षष्ठी का श्राद्ध श्रेष्ठता का कारक
सर्वत्र वर्तमानास्ते पिण्डा: प्रीणन्ति वै पितन्। यदाहारो भवेज्जन्तु: आहार: सोस्य जयते।।
अर्थ - श्राद्धमें पिंडदान से पितर संतुष्ट होते हैं। जिस योनि में वे होते हैं पिंड उनके भोजन में परिणत हो जाता है।
उज्जैन।श्राद्धमें रविवार को षष्ठी तिथि का श्राद्ध होगा। इस दिन वे लोग श्राद्ध करें जिनके परिवार में षष्ठी तिथि को पूर्वज की मृत्यु हुई हो। तीर्थ पुरोहित पं. राजेश त्रिवेदी ने बताया षष्ठी का श्राद्ध श्रेष्ठता का कारक, रविवार का दिन अारोग्यदाता एवं इस दिन कृतिका नक्षत्र तेजस्वी कारक है।
श्रद्धा पर्व
श्राद्ध