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भ्रूण हत्या काे रोकने के लिए मानसिकता बदलनी होगी
भ्रूण हत्या रोकने के लिए समाज में जागरूकता जरूरी है और मानसिकता बदलना इससे भी ज्यादा जरूरी है। सामाजिक परिवेश में पुत्र आवश्यक है तो पुत्री भी उतनी ही आवश्यक है। मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग के स्थापना दिवस पर चेरिटेबल हॉस्पिटल में आयोजित व्याख्यान में यह बात डॉ. कल्पना महाडिक ने कही। उन्होंने मेडिकल स्टॉफ एवं विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा लोगों को समझना होगा कि कन्या भ्रूण हत्या का व्यापार पेरामेडिकल डॉक्टर्स ही कर रहे हैं। वे इसको रोक सकते हैं। कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. जीडी नागर द्वारा विषय प्रवर्तन के साथ हुआ। स्वागत भाषण जिला संयोजक श्री मती नलिनी लंगर ने दिया। शासकीय जीडी कॉलेज के प्राचार्य मो.इशाक मौजूद थे। इस अवसर पर छात्राओं ने कविताएं सुनाकर बेटी का महत्व बताया।
1हजार पर 933 महिला: पैरामेडिकलनर्सेस सौम्या कौशिक एवं डॉ. पारुल शर्मा ने कहा भ्रूण हत्या की शुरुआत घर से होती है। उन्होंने कहा महिलाओं की संख्या वर्तमान में 1 हजार पुरुष पर 933 महिला है इसके मुताबिक 77 पुरुष अविवाहित रह जाएंगे। विशेष अतिथि डॉ. जसविंदर सलूजा ने संबोधित किया।
भ्रूणहत्या पाप: पुष्पामिशन हॉस्पिटल के फादर एंथोनी ने कहा किसी धर्म के अनुसार भ्रूण हत्या करना पाप है। उन्होंने कहा धर्मशास्त्रों में लिखा है कि ईश्वर ने अपनी रूह या अंश से मनुष्य को बनाया है
उपस्थित नर्सेस पेरामेडिकल स्टाफ। संबोधित करते फादर एंथोनी।