कुपोषित बच्चों के लिए आयुर्वेदिक शिविर
कुपोषणसे सुपोषण अभियान के तहत 28 आंगनवाड़ी केंद्रों की कार्यकर्ताओं के आपसी सहयोग से जीवाजीगंज आंगनवाड़ी सेंटर पर जिला परियोजना विभाग एवं जिला आयुष विंग के मार्गदर्शन में 21 दिवसीय आयुर्वेदिक उपचार शिविर शुरू किया गया है। आयुर्वेदिक पद्धति से कुपोषित बच्चों के लिए शुरू किए गए इलाज से सैकड़ों बच्चे सामान्य अवस्था को प्राप्त करने की स्थिति में गए हैं। परियोजना विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कुपोषित बच्चों को एनआरसी में इलाज से ज्यादा फायदा आयुर्वेदिक उपचार से हो रहा है।
महिला एवं बाल विकास विभाग पर्यवेक्षक ज्योति सिकरवार के अनुसार शासन के कुपोषण से सुपोषण अभियान को अायुर्वेदिक उपचार से लाभ मिला है। इसीलिए आंगनवाड़ी कार्यकर्तां एवं महिला एवं बच्चों के लिए काम कर रही डॉ. अपूर्वा विजयवर्गीय के सहयोग से शिविर का अायोजन किया गया। इसमें 76 बच्चे पंजीकृत हुए हैं जिसमें 60 बच्चे लगातार रहे हैं। अभियान के जिला नोडल अधिकारी डॉ.एस एन पांडे ने बताया आयुर्वेदिक उपचार से सैकड़ाें बच्चे लाभान्वित हुए हैं। जो बच्चे पहले शिविर में आए थे, वे सामान्य अवस्था में चुके हैं। परिजनों को उपचार विधि बता दी गई है, जिससे वे घर पर प्रतिदिन बच्चों का उपचार कर रहे हैं।
जिलेमें कुपोषण की स्थिति : महिलाएवं बाल विकास परियोजना अधिकारी राजेश सिन्हा ने बताया जिले में अति कम वजन (गंभीर कुपोषित) 4 हजार 885 एवं कम वजन (मध्यम कुपोषित) 34032 बच्चे हैं। शहर में अति कम वजन (गंभीर कुपोषित) 868 एवं कम वजन वाले 6170 बच्चे हैं। बच्चों काे पोषित करने के लिए शासन स्तर पर प्रयास चल रहे हैं। सिन्हा ने बताया आयुर्वेदिक उपचार से बच्चों में स्थाई परिवर्तन रहा है। उपचार से प्रदेश के बच्चोें को लाभान्वित करने के प्रयास किए जाएंगे।
शहरमें अब तक नहीं लगे पोस्टर
कुपोषणके लिए जागरुकता अभियान के तहत पिछले माह जिला अस्पताल के आयुष विंग में कुपोषित बच्चों के लिए शिविर लगाया गया था, जिसमें शिक्षा मंत्री पारस जैन ने स्वयं आयुर्वेदिक तेल से बच्चों की मालिश की थी। मंत्री जैन ने अभियान के तहत शहर में मुख्य चौराहे पर होर्डिंग लगाने के निर्देश दिए थे लेकिन अब तक होर्डिंग नहीं लगाए गए हैं। सिविल सर्जन डाॅ.डीपीएस गहरवार ने बताया कि पोस्टर लगाने का बजट नहीं है। इसके लिए आयुष विंग को अपने विभाग से बजट लेना पड़ेगा।