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110 दंडी स्वामियों के साथ आए शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती

7 वर्ष पहले
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उज्जैन. कांची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती ने 110 दंडी स्वामियों के साथ शुक्रवार दोपहर 3.15 बजे ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर का अभिषेक किया। इसके बाद शंकराचार्य ने शिप्रातट नृसिंह घाट के पास स्थित ललिता त्रिपुरा सुंदरी देवी मंदिर में मनोकामना सिद्धि के लिए विशेष पूजा की भक्तों को अाशीर्वचन दिए।

शंकराचार्य शुक्रवार दोपहर करीब 12.30 बजे उज्जैन पधारे थे। हरसिद्धि मंदिर के पास अखंड आश्रम चारधाम मंदिर में कुछ देर विश्राम करने के बाद वे मंदिरों में दर्शन पूजन के लिए निकले। शंकराचार्य के साथ दक्षिण भारत सहित देश के कई शहरों के 110 दंडी स्वामी भी उज्जैन पधारे हैं। शाम 6 बजे शंकराचार्य ने चारधाम मंदिर के प्रवचन हॉल में दंडी स्वामियों से भेंट की। शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती शनिवार को चारधाम मंदिर में श्राद्ध करेंगे तथा दंडी स्वामियों को भोज देकर दक्षिणा भेंट कर सम्मान करेंगे। चारधाम मंदिर में पत्रकारों से शंकराचार्य ने इतना ही कहा सिर्फ आशीर्वाद लें, सवाल-जवाब करें। कार्यक्रम में शामिल होने देशभर से शंकराचार्य के 50 से अधिक अनुयायी भी यहां पधारे हैं। प्रतिवर्ष श्राद्ध पक्ष में यह आयोजन होता है। इस बार शंकराचार्य की इच्छा से उज्जैन में किया जा रहा है।

गर्भगृह में कुर्सी पर बैठकर पूजा: शंकराचार्यजयेंद्र सरस्वती का स्वास्थ्य ठीक नहीं है। मुंबई से आए उनके एक अनुयायी श्रीधर ने कहा अधिक उम्र के कारण अब वे ज्यादा चल-फिर नहीं पाते। महाकाल मंदिर में भी शंकराचार्य को जूना महाकाल के पीछे गेट से व्हीलचेयर पर बैठाकर नंदीहॉल तक लाए गर्भगृह में कुर्सी पर बैठकर उन्होंने महाकाल की पूजा की। पुजारी दिनेश गुरु, कैलाश गुरु ने पूजन कराया। नंदीहॉल में सहायक प्रशासनिक अधिकारी दिलीप गरुड़ ने सोले में उनका स्वागत किया।