तहसीलदार ने सरकारी जमीन कर दी निजी
तरानातहसीलदार डीके वर्मा के खिलाफ जनसुनवाई में पहुंची शिकायत की जांच में अपर कलेक्टर पवन जैन ने पाया है कि वर्मा ने अपने अधिकारों से बाहर जाकर सरकारी जमीन निजी कर दी। इस कारण शासन को 10 लाख 72 हजार रुपए की राजस्व हानि हुई। जैन ने वर्मा का निलंबन कर विभागीय जांच के लिए कलेक्टर कवींद्र कियावत से अनुशंसा की है। हालांकि तहसीलदार के निलंबन का अधिकार संभागायुक्त डॉ. रवींद्र पस्तौर के पास है, जिस पर वे कलेक्टर की अनुशंसा के बाद कोई निर्णय ले सकते हैं।
तहसीलदार वर्मा पर ये आरोप साबित
अपरकलेक्टर जैन ने अपनी जांच रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि तराना तहसीलदार डीके वर्मा ने प्रकरण में विचाराधिकार क्षेत्र से परे जाकर नियम एवं प्रावधानों का उल्लंघन किया है। उन्होंने शासकीय एक हेक्टेयर भूमि का व्यवस्थापन निजी व्यक्तियों के नाम कर दिया, जिससे लगभग 10 लाख 72 हजार रुपए की राजस्व हानि हुई है। साथ ही शासकीय भूमि को खुर्द-बुर्द किया गया। इसलिए तराना तहसीलदार डीके वर्मा को उक्त कार्य के लिए निलंबित किया जाकर विभागीय जांच बैठाया जाना प्रस्तावित है।
निलंबनकी कार्रवाई प्रस्तािवत
^जनसुनवाईमें आई शिकायत की जांच के बाद तहसीलदार डीके वर्मा पर निलंबन की कार्रवाई प्रस्तावित की गई है।\\\'\\\' पवनजैन, अपरकलेक्टर
यह है शिकायत
तरानातहसील के ग्राम रायपुरा निवासी शंकरलाल अन्य ग्रामीणों ने 22 जुलाई 14 को जनसुनवाई में शिकायत कर बताया कि रायपुरा में सर्वे क्रमांक 370 पर 4.710 हेक्टेयर सरकारी भूमि थी। उक्त भूमि में से वर्षों पूर्व पांच पट्टे काटकर आवंटित कर दिए गए थे लेकिन एक हेक्टयेर भूमि तब से अब तक शेष रही थी। इस शासकीय भूमि से लगा महादेवजी का मंदिर त्रिवेणी नदी का घाट है। यहां पर कालीसिंध, टीलर नदी छापरे का संगम है। इस स्थान पर तराना सहित खारपा, शिपुरा, भेरूपुरा, हात्याखेड़ी, सुमराखेड़ा अन्य गांवों के श्रद्धालु आते हैं। इस एक हेक्टेयर भूमि का पट्टा अवैध तरीके से कमल पिता काशीराम निवासी रायपुरा ने करवा लिया। इसकी जांच करवाकर कार्रवाई की जाए।