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गीता 5151 साल पुरानी, इतने ही यज्ञ सिंहस्थ में करेंगे

5 वर्ष पहले
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उज्जैन। श्रीमद् भागवत गीता को 5151 साल हो गए हैं। सिंहस्थ में इतने ही हवनात्मक यज्ञ महामंडलेश्वर स्वामी डॉ. शाश्वतानंदजी गिरि करेंगे। गीता के 700 श्लोकों के अनुसार यज्ञ होंगे और प्रत्येक श्लोक पर व्याख्यान भी। गीता से कैसे ध्यान लगाएं यह भी सिखाया जाएगा। गीता पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन भी होगा। एक तरह के सिंहस्थ में महामंडलेश्वरजी का शिविर गीता कुंभ होगा।

स्वामीजी के सिंहस्थ पंडाल का भूमिपूजन मंगलवार सुबह बड़नगर रोड़ स्थित रामराज्य गौशाला के पीछे किया गया। कार्यक्रम में संघ प्रचारक विनोद कुमार, ननि परिषद अध्यक्ष सोनू गेहलोत, समाजसेवी कृष्णमंगलसिंह कुलश्रेष्ठ, सुधीर भाई गोयल, इंदौर संघ संचालक लक्ष्मण नवाथे, संदीप कुलश्रेष्ठ आदि मौजूद थे। स्वामीजी ने मीडिया से चर्चा में कहा गीता में विश्व की सभी समस्याओं का समाधान है। इसमें अंधविश्वास, संप्रदायवाद, जाति भेद, वर्ग भेद कहीं कुछ नहीं मिलेगा। सिंहस्थ में होने वाले अंतर्राष्ट्रीय गीता सम्मेलन में विद्वानों, संतो के अलावा प्रो. हनीफ खान जैसे गीता के विद्वान विदेशों से भी आएंगे।

गीता को पाठ्यक्रम में शामिल करें: स्वामीजी ने कहा गीता को पाठ्यक्रम में शामिल करने पर कोई विवाद नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि यह किसी अन्य धर्म का ग्रंथ होता तो हिंदू भी इसे पढ़ रहे होते। विद्वान भी इसे पाठ्यक्रम में शामिल करने पर राजी हो जाते। उन्होंने कहा हिंदू का विरोध फैशन बन गया है। वंदे मातरम्, सूर्यनमस्कार पर भी विवाद है। विवाद पैदा किए जाते हैं।

11 कुंडों के नाम

यज्ञाशाला के अंदर चार चौकोर कुंड हंै। इसके अलावा योनी कुंड, त्रिकोण कुंड, षडकोण कुंड, पद्म कुंड, अष्टकोण कुंड, वृत्त कुंड और अद्र्धचंद्राकार कुंड है। इन कुंडों को दिशा के अनुरूप तैयार किया है।


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