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सब्जियों की खेती के नए तरीके से किसानों की आर्थिक स्थिति में आया बदलाव

5 वर्ष पहले
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परंपरागत खेती के तरीकों में थोड़ा सा बदलाव कर किसान किस तरह समृद्ध हो सकते हैं, इसका उदाहरण बड़नगर तहसील के ग्राम जहांगीरपुर के किसानों ने प्रस्तुत किया है। किसानों ने सब्जियों की खेती का नया तरीका निकाला आैर देखते ही देखते दस सालों में किसानों की आर्थिक स्थिति बदल गई। उज्जैन से करीब 35 किलोमीटर दूर उन्हेल-नागदा मार्ग स्थित ग्राम जहांगीरपुर तहसील का दूसरा सबसे बड़ा गांव है। किसानों की स्थिति बदली तो इसका सीधा असर गांव की समृद्धता में भी दिखाई देने लगा। शहरों की तर्ज पर बने अत्याधुनिक घर, पक्की सड़कें, स्वास्थ्य सुविधाएं आैर किसानों की उच्च स्तरीय जीवनशैली ने गांव के विकास की राह को आैर मजबूत किया है। राजपूत, मुस्लिम, काछी, ब्राहृाण सहित अन्य वर्गों के लोगों का भी मुख्य व्यवसाय यहां खेती ही है। गांव के अरविंद तिवारी ने बताया दस साल पहले तक केवल 20 प्रतिशत किसान ही यहां सब्जियों की खेती करते थे लेकिन अब यह आंकड़ा बढ़कर 70 से 80 प्रतिशत हो चुका है।

कम समय आैर लाभ ज्यादा: जहांगीरपुर के किसान बलवंत सिंह सोलंकी, शंकर सिंह राठौर, रमणलाल पंड्या, हुकुमसिंह राठौर, वीरेंद्र सिंह राठौर आदि ने बताया एक दशक पहले तक यहां केवल किसान गेहूं, चना, सोयाबीन की ही खेती करते थे। जिससे सालभर में कोई खास मुनाफा नहीं हो पाता था। किसानों ने गेहूं-चने के अलावा आलू, बटले, टमाटर, प्याज, लहसुन सहित सब्जियों की खेती भी शुरू की। मात्र एक से तीन महीने की इन फसलों में लागत व समय कम लगता है आैर मुनाफा भी अच्छा रहता है। यही वजह है कि सब्जियों की अच्छी खेती ने किसानों की आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव ला दिया।

पेयजल सहित गांव में यह परेशानी भी : गांव में पेयजल सहित कुछ परेशानियां भी हैं। करीब 15 हैंडपंप में से लगभग आधा दर्जन ही चल रहे हैं, शेष सूख चुके हैं। एकमात्र पशु चिकित्सालय में भी पिछले दो वर्षों से कोई नियमित चिकित्सक उपलब्ध नहीं है, जिससे पशु चिकित्सा के लिए बड़नगर व उज्जैन जाना पड़ता है। कई क्षेत्रों में सड़कें नहीं बनी हैं। सरपंच महेंद्र सिंह राठौर ने बताया गांव में चारों आैर सड़कें बनाए जाने का कार्य जल्द करवाया जाएगा। पशु चिकित्सालय को भी नियमित खुलवाने के लिए जल्द जिलाधीश से मिलेंगे। पेयजल व्यवस्था को भी दुरुस्त करने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे।

चलो, गांव चलें
जहांगीरपुर, जिला उज्जैन

किसानों की आर्थिक स्थिति में आए बदलाव का अंदाजा गांव में बनी ऊंची इमारतों को देखकर लगाया जा सकता है। पिछले दस सालों में शहरों की तर्ज पर गांव में किसानों के अत्याधुनिक घर बन गए हैं।

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