सिंहस्थ क्षेत्र की अधिसूचना का इंतजार
प्रशासनके लिहाज से सिंहस्थ 2016 के लिए महज 15 माह बाकी है। बावजूद अब तक सिंहस्थ क्षेत्र की अधिसूचना घोषित नहीं की जा सकी है, जबकि सिंहस्थ 2004 में यह अधिसूचना तीन-चार साल पहले ही घोषित कर दी गई। इस अधिसूचना के देरी होने से अब विरोध के स्वर सुनाई देने लगे हैं। वहीं प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि समिति द्वारा तैयार किए 4 हजार हेक्टेयर भूमि के प्रपोजल पर मंथन किया जा रहा है। जल्द ही अधिकारी-नेताओं के बीच विचार-विमर्श कर अधिसूचना जारी कर दी जाएगी। इधर घट्टिया उज्जैन एसडीएम ने सिंहस्थ क्षेत्र में अखाड़ों की भूमि के सत्यापन के लिए अलग-अलग टीम नियुक्त की है। जो मौके पर जाकर भौतिक सत्यापन का कार्य कर रही है।
गौरतलब है कि 2004 में सिंहस्थ के लिए 2151 हेक्टेयर भूमि अधिसूचित की गई थी, जिसमें सिंहस्थ के लिए करीब 1500 हेक्टेयर भूमि का उपयोग हुआ था। करीब 700 हेक्टेयर भूमि खाली रही थी। हालांकि इस भूमि में गड्ढे, पहाड़, तालाब अन्य स्थान भी शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक सिंहस्थ 2016 के लिए 2028 के दृष्टिगत 700 हेक्टेयर भूमि और अधिक चिह्नित की गई है। यह भूमि बड़नगर रोड अंकपात रोड के बीच है। 700 हेक्टेयर भूमि के और अधिग्रहण की जानकारी के बाद प्रशासन में शिकवे-शिकायतें बढ़ने लगी थी, जिस पर तत्कालीन कलेक्टर बीएम शर्मा ने जमीन के आंकलन के लिए एक समिति का गठन किया था। इस समिति के अध्यक्ष तत्कालीन नगर निगम आयुक्त विवेक श्रोत्रिय सदस्य सिंहस्थ उप मेला अधिकारी गोपालचंद्र डाड घट्टिया तथा उज्जैन एसडीएम एवं तहसीलदार थे। बताया जाता है समिति ने चार हजार हेक्टेयर भूमि का प्रपोजल बनाया है, जिसका जनप्रतिनिधियों द्वारा विरोध किया जा रहा है। उनका मानना है कि जितनी जमीन का उपयोग हो उतनी ही अधिसूचित की जाए। कलेक्टर के मुताबिक आंकलन किया जा रहा है। जल्द ही अधिसूचना जारी कर दी जाएगी।