उज्जैन। सिंहस्थ में आने वाले यात्रियों को महाकाल मंदिर के समीप स्थित रुद्रसागर में न्यायप्रिय सम्राट विक्रमादित्य की कहानियां देखने और सुनने को मिलेंगी। रुद्रसागर में सिंहासन बत्तीसी आकार ले रहा है। यहां करीब 15 फीट ऊंचे सिंहासन पर 25 फीट ऊंची विक्रमादित्य की प्रतिमा यात्रियों को दूर से ही आकर्षित करेगी।
रुद्रसागर के बीच एक पुराना टीला है, जिसे लेकर यह किंवदंती है कि इसके नीचे सम्राट विक्रमादित्य का सिंहासन दबा है। नगर निगम ने सिंहस्थ योजना में इस टीले को सिंहासन बत्तीसी के रूप में विकसित करने की योजना बनाई। इस पर करीब 5 करोड़ रु. खर्च हो रहे हैं। मूिर्तयों की लागत 98 लाख रुपए है। टीले तक पहुंचने के लिए जहां ब्रिज बनाया है वहीं टीले को लाल पत्थरों की कारीगरी से संवारा है।
टीले के पूर्वी हिस्से में सम्राट विक्रमादित्य का सिंहासन बनाया जा रहा है, जिस पर करीब 25 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित होगी। इसके अलावा विक्रमादित्य के नव र|ों और 32 पुतलियों को भी लगाया जाएगा। विक्रमादित्य के दरबार के नव र| प्रसिद्ध हैं, जो खास विषय के मर्मज्ञ माने गए। 32 पुतलियां सम्राट की कहानियां सुनाती हैं। विक्रमादित्य की कहानियों को अब यहां यात्री मूर्तियों और ऑडियो-वीडियो के माध्यम से सीधे देख सकेंगे।
गन मेटल की मूर्तियां
ननि ने मूर्तियां इंदौर के मूर्तिकार से बनवाई है। ये मूर्तियां गन मेटल की बनी हैं, जो सैकड़ों साल खराब नहीं होंगी। यहां एक ऑडियो-वीडियो रूम बनाया गया है, जिसमें यात्रियों को विक्रमादित्य के बारे में ज्ञान इतिहास और जनश्रुतियों से अवगत कराया जाएगा। यात्री यहां आकर विक्रमादित्य के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। ननि आयुक्त अविनाश लवानिया के अनुसार सिंहासन बत्तीसी का काम 15 मार्च तक पूरा होने की संभावना है।
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