उज्जैन। नगर भाजपा कार्यकारिणी की बैठक में सोमवार शाम उस समय हंगामा मच गया, जब गो सेवा प्रकोष्ठ के संयोजक राकेश वनवट ने प्रकोष्ठ की गतिविधियों की जानकारी देते वक्त जाति का उल्लेख किया। जाति सूचक शब्द सुनते ही अजा वर्ग के कार्यकर्ता भड़क गए और वनवट के साथ झूमा-झटकी और हाथापाई पर उतर आए। इस दौरान मारपीट की कोशिश भी की। वरिष्ठ नेताओं ने स्थिति संभाली और दोनों पक्षों को शांत किया। बाद में दोनों पक्षों ने माफी मांगी और गले मिलकर बैठक की कार्रवाई शुरू कराई।
लोकसभा चुनाव के बाद पहली बार नगर भाजपा की कार्यकारिणी की बैठक सोमवार शाम 3 बजे बुलाई गई थी। नगर अध्यक्ष इकबालसिंह गांधी अध्यक्षता में इंदौर फोरलेन स्थित निजी गार्डन में बैठक हुई। बैठक में मंडल, मोर्चा और प्रकोष्ठ के पदाधिकारियों ने अपने संगठन की गतिविधियों की जानकारी दी। वनवट ने गोसेवा प्रकोष्ठ की जानकारी देते हुए इंदौर फोरलेन के किनारे मृत गोवंश पर चर्चा के दौरान जाति का उल्लेख किया।
जाति शब्द सुनते ही अजा नेता और कार्यकर्ता उठ गए और वनवट पर पिल पड़े। इनमें ओमप्रकाश मोहने, सुरेश कुसमारिया, कमलकांत राजोरिया शामिल थे। इससे हंगामा शुरू हो गया। बैठक में अफरा-तफरी देख गांधी ने मीडिया कर्मियों को बाहर ले जाने की बात कही तो मीडियाकर्मी भी नाराज हो गए। हंगामे की स्थिति देख वरिष्ठ नेताओं ने तुरंत दोनों पक्षों को अलग किया। मीडिया प्रभारी सचिन सक्सेना के अनुसार बैठक में प्रभारी हिम्मत कोठारी आने वाले थे लेकिन नहीं आए।
दोनों पक्ष गले मिले : घटना को लेकर सांसद डॉ. चिंतामणि मालवीय ने कहा मैं इन सबके लिए माफी मांगता हूं। दोनों पक्षों को मंच पर लाकर गले मिलवाया गया। दोनों ने गलती के लिए क्षमा मांगी। इसके बाद बैठक की अगली कार्रवाई शुरू हुई।
वनवट का कहना: वनवटने भास्कर से कहा- मेरे कहने का आशय यह था कि इंदौर फोरलेन के किनारे गोवंश काटकर चमड़े ले जाते हैं और मांस आदि फेंक जाते हैं। इससे गोवंश की दुर्गति होती है। अपने वाक्य में उन्होंने कसाइयों के साथ एक जाति का उल्लेख भी किया। उन्होंने कहा कि मेरा इरादा तो किसी जाति का उल्लेख करना था और ही किसी भी भावना को ठेस पहुंचाना। इधर अजा मोर्चा अध्यक्ष सत्यनारायण खोईवाल का कहना है कि विरोध करने वाले अजा कार्यकर्ता जरूरी हैं लेकिन नगर अजा मोर्चा में नहीं है। यह पार्टी का पारिवारिक मामला था जो सुलझ गया। इधर महापौर रामेश्वर अखंड ने 4 साल के कार्यकाल का विवरण देते वक्त कहा कि इन सालों में जितने काम हुए हैं, उतने कभी 50 साल में नहीं हुए।
''कार्यकर्ताओं के बीच कुछ गलत फहमी हो गई थी। स्थिति स्पष्ट होने पर दोनों पक्षों ने गलती मान ली और एक दूसरे से माफी मांग ली। विवाद और मारपीट नहीं हुई।'' इकबाल सिंह गांधी, नगरभाजपा अध्यक्ष
गोसेवा प्रकोष्ठ के कार्य वृत्त में शब्द आने पर अजा कार्यकर्ता हुए बेकाबू ।
(बैठक में हंगामें के दौरान कार्यकर्ताओं को समझाइश देकर शांत करते वरिष्ठ नेता।)