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कहत कबीर लजाय

7 वर्ष पहले
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(विहिप व बजरंगदल कार्यकर्ताओं से कुलपति कौल को बचाने का प्रयास करते प्रोफेसर ढंढ। )
उज्जैन। शाम करीब 4 बजे हाथों में लाठियां लिए 35-40 बजरंग दल आैर विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ता सीधे कुलपति कक्ष पहुंचे थे। चंद मिनट बाद ही माधवनगर थाने के एसआई अभिषेक गौतम आैर मुनेंद्र गौतम सहित 3-4 पुलिसकर्मी भी पहुंचे लेकिन कार्यकर्ताओं की बातचीत तोड़फोड़ के दौरान भी पुलिस अधिकारी लाचार दिखाई दिए।
जैसे ही कार्यकर्ताओं ने तोड़फोड़ शुरू की तो पुलिस अधिकारी केवल उन्हें समझाने प्रयासभर करते रहे लेकिन कोई सख्त कार्रवाई नहीं की। इस दौरान विवि के डॉ. राकेश ढंड, डॉ. दर्शन दुबे, डॉ. शिशिर श्रीवास्तव, राजेश ठाकुर सहित कुलपति कार्यालय के कर्मचारी किसी तरह कुलपति को बचाकर एक तरफ ले गए।
कुलपति कक्ष से लेकर बाहर तक कार्यकर्ता उत्पात मचाते हुए बैखोफ तोड़फोड़ करते हुए निकल गए। घटना के बाद सभी प्रोफेसर्स कर्मचारियों ने विवि भवन के बाहर एकत्रित होकर काम बंद कर दिया।

कुलपति ने मांगा गनमैन: घटना के बाद कुलपति प्रो. कौल ने पुलिस प्रशासन से गनमैन की मांग की है। इसके पूर्व डॉ. शिवपालसिंह अहलावत के कार्यकाल में कुलपति के साथ गनमैन तैनात रहता था लेकिन प्रो. टीआर थापक ने कुलपति बनने के बाद खर्च में कटौती को देखते हुए गनमैन को हटा दिया था।

आज प्रोफेसर्स-कर्मचारी करेंगे विरोध
घटनाके विरोध में मंगलवार को प्रोफेसर्स कर्मचारियों की ओर से विश्वविद्यालय बंद रखा जाएगा। विवि शिक्षक संघ अध्यक्ष प्रो. एसके मिश्रा ने बताया तोड़फोड़ करने वाले लोगों की जल्द गिरफ्तारी की मांग को लेकर सुबह 11 बजे विवि में विरोध दर्ज कराया जाएगा। इसके बाद सभी शिक्षक कर्मचारी कोठी पैलेस स्थित कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन देंगे।
युकां आज करेंगे कंट्रोल रूम का घेराव: युवा कांग्रेस भी घटना के विरोध में उतर आई है। युवा कांग्रेस के लोकसभा क्षेत्र अध्यक्ष हेमंत सिंह चौहान ने बताया शिक्षा के क्षेत्र में इस तरह की घटना निंदनीय है। घटना के विरोध में मंगलवार सुबह 11.30 बजे युवा कांग्रेस की ओर से पुलिस कंट्रोल रूम का घेराव कर एसपी अनुराग को ज्ञापन दिया जाएगा।

विहिप ने कहा आरोप झूठे : घटना के बाद बजरंग दल नेता महेश आंजना का जहां मोबाइल बंद मिला, वहीं विहिप नेता मुकेश यादव ने बताया कि कुछ कार्यकर्ताओं पर प्रकरण दर्ज करने का पता चला है। आरोप झूठे हैं। पुलिस जांच कर उचित कार्रवाई करे, हम सहयोग करेंगे।

''शिकायतीआवेदन में लिखा है कि वे तोड़फोड़ करने वाले किसी कार्यकर्ता को नहीं पहचानते, इसलिए अज्ञात लोगों पर प्रकरण दर्ज किया है। वीडियो फुटेज के आधार पर आरोपियों की शिनाख्त कर गिरफ्तारी की जाएगी। घटना के तत्काल बाद पुलिसकर्मी कैबिन में पहुंचे आैर उन्होंने ही कुलपति को बचाया।'' अनुराग,एसपी

भावुक हुए प्रो. कौल: आईसीयूमें भर्ती प्रो. कौल विवि के प्रोफेसर्स से चर्चा में भावुक हो उठे। प्रो. कौल का ब्लडप्रेशर हाई होने आैर सांस लेने में परेशानी होने से आईसीयू में देर रात तक उपचार चलता रहा। अस्पताल में सांसद डॉ. चिंतामणि मालवीय, एसपी अनुराग, कार्यपरिषद सदस्य हरनामसिंह यादव, कांग्रेस नेता योगेश शर्मा प्रो. कौल का हाल जानने पहुंचे।
आइए उत्पात,बेबसी और अनदेखी के बीच शुक्र मनाएं
कहत कबीर लजाय : (विवेक चौरसिया)।
कश्मीर में सैलाब की तबाही पर जिस अवाम की मदद के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरी ताकत झोंक दी, उसी कश्मीर के छात्रों को राहत देने के आह्वान मात्र पर उज्जैन की भगवा िब्रगेड इस कदर उबली कि विश्वविद्यालय में कोहराम मचा दिया। हाथ में लािठयां लेकर कुलपति को ‘समझाने’ पहंुचे स्वयंभू हिंदूवादी नेता इतने तैश में थे कि बात दो मिनट की, तोड़फोड़ में पूरे 10 मिनट लगाए। नतीजा कुलपति को गश गया और वे आईसीयू ले जाए गए। विश्वविद्यालय की गरिमा पर कालिख पुती, सो अपनी जगह।

कुलपति का ‘गुनाह’ इतना ही है कि उन्होंने उज्जैन में किराए से रहकर पढ़ रहे कश्मीरी छात्रों को सैलाब के मद्देनजर किराए में राहत देने का आह्वानभर मकान मालिकों से किया था। जिन कश्मीरियों के लिए देशभर मंंे लंगर और मदद के लिए खजाने खोल दिए गए हैं, उनको चुटकीभर राहत के लिए जरा-सा मुंहभर खोल देने मात्र पर कुलपति को भगवा ब्रिगेड के लठैतों ने कटघरे में खड़ा कर दिया। आश्चर्य है कि इन्हें किसी ने रोका ही नहीं। संगठन के जिम्मेदारों ने, मौके पर मौजूद पुलिस के पहरेदारों ने। पुलिस मौके पर थी पर बेबस। हाल ही में जिस विश्वविद्यालय के एक विभाग का अध्यक्ष उज्जैन का सांसद बना हो, उसकी पुलिस हाथ की लािठयों को छोड़ खुद कठपुतलों सी खड़ी रही।

भाजपा की सरकार है, इसलिए भगवा ब्रिगेड के उत्पात को एक एक्शन ड्रामा की तरह मूकदर्शक बन देखना ही जवानों ने शायद नीित सम्मत माना। उससे बड़ी हैरानी ये कि जब मुकदमा दर्ज किया गया तो अपराधी अज्ञात हो गए। जिन्हें दर्जनों ने देखा, पुलिस जवानों ने रोका, मीिडया ने जिनके फोटो लिए, वे एफआईआर के वक्त कैसे अनजान हो गए, इसका जवाब आने वाली पीढ़यां जरूर खोजेंगी। विश्वविद्यालय के प्रोफेसर हंगामाइयों को पहचानते हैं कर्मचारी। सबको नौकरी प्यारी है और उससे ज्यादा जान।
क्लास रूम में सच और बलिदान पर किताबी लेक्चर बांचने वालों का ये रूख छात्रों को कौन सी सीख देगा, समझा जा सकता है। राजनीित, कानून और शिक्षा में जब उद्दंडता, बेबसी और अनदेखी इस कदर हावी हो गई हो तो फिर सोमवार की शाम की पुनरावृित्त को रोकने के लिए दुआएं मांगना बेमानी है। हां, पूरे उज्जैन को यह शुक्र जरूर करना चाहिए कि हम एक और सभरवाल कांड से बच गए। आमीन।
सुनो भई साधो
सत्यको जानते हो, हकीकत पहचानते हो
हो उसके दावेदार तो
आओ और ऊंचे स्वरों में करो उसका उद्धोष
बुिद्धजीवी जब गूंगों में शामिल हो जाते हैं
तो गू्ंगेपन को ही उपलब्धि साबित
करने में व्यस्त हो जते है। -दिनकर सोनलवकर ।
पीएम भी मदद कर रहे तो मैंने क्या गलत किया
बाढ़पीड़ितों के लिए प्रधानमंत्री मोदी सहित पूरा देश मदद के लिए आगे रहा है, तो मैंने क्या गलत किया। कुलपति कक्ष में प्रो. कौल कार्यकर्ताओं को कुछ ऐसे ही संवाद के साथ समझाने का प्रयास करते रहे लेकिन कार्यकर्ता उनकी कोई बात सुनने को राजी नहीं थे। जिस तरह हाथों में लाठियां लेकर कार्यकर्ता वहां पहुंचे, उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि उनकी मंशा केवल हंगामा तोड़फोड़ करना ही थी। गौरतलब है कुलपति प्रो. कौल भी मूलरूप से कश्मीर के रहने वाले हैं।