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सीएमएचओ कार्यालय में 17 लाख रु. के टेंडर में विवाद, आपत्ति के बाद नहीं खोले

7 वर्ष पहले
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>एफडीदी जाए या डीडी स्पष्ट नहीं है।

>टेंडर की समय सीमा नहीं बता रहे।

>फर्म के अनुभव के बारे में जिक्र नहीं।

>समय पर जाने के बाद भी टेंडर नहीं डालने दिए।

भास्कर संवाददाता | उज्जैन

मुख्यचिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय में सोमवार को स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं की प्रचार सामग्री के टेंडर को लेकर विवाद खड़ा हो गया। ठेकेदारों का आरोप है तय समय पर पहुंचने के बाद भी उन्हें टेंडर फार्म नहीं डालने दिया गया। टेंडर पेटी को कर्मचारी उठाकर ले गए। आपत्ति के बाद टेंडर नहीं खोले गए हैं। वहीं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का तर्क है कि समय पूरा होने के बाद ठेकेदार आए थे, इस वजह से उनके फार्म नहीं लिए गए हैं।

जिले में स्वास्थ्य योजनाओं का प्रचार-प्रसार करने के लिए प्रचार सामग्री उपलब्ध करवाने के लिए सोमवार को सीएमएचओ कार्यालय में टेंडर बुलाए थे। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) से इसके लिए बजट का आवंटन होता है। दो वर्ष के लिए यह ठेका किया जाएगा जो करीब 17 लाख का है। टेंडर फार्म डाले जाने का समय सुबह 10.30 से दोपहर 1 बजे तक था। टेंडर प्रक्रिया में शामिल होने के लिए अधिकांश एनजीओ आए थे। टेंडर डालने आए तीन ठेकेदारों के फार्म नहीं लिए गए। उप जिला विस्तार एवं माध्यम कार्यालय से टेंडर पेटी को दोपहर 1 बजे सीएमएचओ कार्यालय भेज दिया। इस पर ठेकेदारों ने आपत्ति ली। ठेकेदार प्रभारी सीएमएचओ डॉ. अशोक यादव के पास पहुंचे और आरोप लगाया कि समय से पहुंचने के बाद भी उनके टेंडर फार्म नहीं लिए गए। डॉ. यादव ने पता किया तो उन्हें स्टॉफ ने बताया कि समय हो गया था, संबंधित ठेकेदार करीब 10 मिनट देरी से आए थे, ऐसे में उनके टेंडर फार्म नहीं लिए जा सकते थे। दोपहर 1 बजे टेंडर फार्म लेना बंद कर दिया गया। पेटी को सील कर दिया गया। विवाद के बाद अब 25 सितंबर को खोले जाने का निर्णय लिया गया।

^टेंडरडालने का समय दोपहर 1 बजे तक था। जो ठेकेदार बाद में आए थे, उनके टेंडर फार्म नहीं लिए हैं। विवाद जैसी कोई बात नहीं। मामले से अपर कलेक्टर को अवगत करा दिया गया है।\\\'\\\' डॉ.अशोक यादव, प्रभारीसीएमएचओ

^समयपर पहुंचने के बाद भी टेंडर नहीं डालने दिया गया। इसको लेकर आपत्ति लगाई गई है।\\\'\\\' पप्पूसिंह, संचालक,मां संतोषी लोक कला मंडल