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लाखों वर्ष पुराने जीवाश्म देख चकित हुए संभागायुक्त अधिकारी

7 वर्ष पहले
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विक्रमविवि के पुरातत्व संग्रहालय का सोमवार को संभागायुक्त डॉ. रवींद्र पस्तौर ने निरीक्षण किया। इस दौरान संग्रहालय में लाखों वर्ष पुराने जीवाश्म, दारा शिकोह की लिपियों के ग्रंथ आैर सम्राट अशोक के स्तंभ को देखकर डॉ. पस्तौर सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी भी चकित रह गए।

निरीक्षण में डॉ. पस्तौर के साथ विक्रम विवि के कार्यवाहक कुलपति डॉ. एमएस हाड़ा, कलेक्टर कवींद्र कियावत, निगमायुक्त सिंहस्थ मेला अधिकारी अविनाश लवानिया, महाकाल मंदिर प्रशासक जयंत जोशी सहित अन्य अधिकारी भी मौजूद थे। निरीक्षण के दौरान डॉ. पस्तौर ने कहा संग्रहालय का संग्रहण हमारी राष्ट्रीय धरोहर है। आगामी सिंहस्थ 2016 में आने वाले श्रद्धालुओं की जानकारी में भी यह संग्रहालय रहना चाहिए। डॉ. पस्तौर ने संग्रहालय के बेहतर रख-रखाव सहित प्रत्येक प्रदर्श के साथ उसका परिचय देते हुए डिसप्ले रखने के निर्देश दिए। संग्रहालय प्रभारी डॉ. रमण सौलंकी ने उन्हें संग्रहालय के संबंध में जानकारियां दी।

5करोड़ से होगा विक्रम कीर्ति मंदिर का जीर्णोद्धार

सोमवारको संभागायुक्त डॉ. पस्तौर की अध्यक्षता में शिप्रांजलि न्यास की बैठक भी हुई। जिसमें विक्रम कीर्ति मंदिर के जीर्णोद्धार को लेकर चर्चा हुई। बैठक में 5 करोड़ रुपए की लागत से विक्रम कीर्ति मंदिर के जीर्णोद्धार, बहिरंग सभागार आैर वाटिका का निर्माण किए जाने का निर्णय लिया गया। डॉ. पस्तौर ने महाकाल मंदिर प्रशासक जयंत जोशी को मंदिर की गतिविधियों को विस्तार देने के साथ ही विक्रम कीर्ति मंदिर को महाकालेश्वर मंदिर ट्रस्ट से जोड़ने के भी निर्देश दिए। बैठक में कार्यवाहक कुलपति डॉ. हाड़ा, निगमायुक्त लवानिया, यूडीए सीईओ शिवेंद्र सिंह, ट्रस्ट के सदस्य आनंद बांगर सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे। बैठक से पहले संभागायुक्त डॉ. पस्तौर कलेक्टर कियावत ने विक्रम कीर्ति मंदिर का निरीक्षण भी किया।

20 हजार हस्तलिखित पांडुलिपियों का संग्रह

उज्जयिनीके आसपास बिखरी बहुमूल्य पांडुलिपियों के संग्रह आैर संरक्षण के लिए सिंधिया राजवंश के अंतर्गत तत्कालीन ग्वालियर राज्य की ओर से 20 अक्टूबर 1931 को प्राच्य ग्रंथ संग्रह के नाम से एक हस्तलिखित संग्रहालय के रूप में इसकी शुरुआत हुई थी। इसमें 20 हजार हस्तलिखित पांडुलिपियां संग्रहित हैं। जिनमें ब्राह्मी, शारदा, देवनागरी आदि विभिन्न लिपियों में लिखित इन ग्रंथों मे