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देर से पहुंचने वालों के टूटे सपने

7 वर्ष पहले
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सेनाकी पहचान अनुशासन से है। इसमें भी समय का पाबंद होना अहम है। यह बात बुधवार दोपहर पहुंचे युवाओं को सेना अधिकारियों ने समझा दी। आर्मी मैन का सपना लिए देर से पहुंचे युवाओं को अधिकारियों ने मैदान में दाखिल ही नहीं होने दिया। जो दाखिल हुए उनमें कुछ युवा प्री हाइट में ही बाहर हो गए। प्रक्रिया शाम तक चली। निराश युवा दोपहर को लौट गए। इस दौरान रेलवे स्टेशन पर युवाओं की भीड़ देखी गई।

बुधवार को सेना भर्ती के दूसरे दिन उज्जैन, झाबुआ नीमच के युवाओं को मौका दिया। बाहर से आने वाले युवाओं के लिए अधिकारियों ने रिपोर्टिंग समय रात 2.30 बजे दिया है। इसके बाद आने वाले युवाओं का प्रवेश वर्जित है। करीब 600 युवा प्रक्रिया के लिए सुबह पहुंचे। इन्हें प्रवेश नहीं दिया। निराश युवा मैदान के बाहर सड़क पर रुके रहे। इसके बाद दोपहर को लौटने के लिए रेलवे स्टेशन पहुंच गए। यहां टिकट काउंटर प्लेटफॉर्म पर युवाओं का हुजूम दिखा। ट्रेन में चढ़ने के लिए वे पटरी पर उतर गए।

सुबह 6 बजे से शुरू हुई प्रक्रिया में 7500 युवा शामिल हुए। प्री हाइट में 900 युवा बाहर हो गए। 6600 युवा दौड़ में शामिल हुए। इनमें 594 युवा ही निर्धारित समय में दौड़ पूरी कर सके। प्रक्रिया शाम तक चली।

झाबुआसे कम रुझान

बुधवारको भर्ती के लिए नीमच, उज्जैन झाबुआ के युवाओं को आमंत्रित किया था। इसमें भी झाबुआ के युवाओं में कम रुझान देखने में आया। कर्नल सुनीत सिंह ने बताया झाबुआ के युवा भर्ती में कम शामिल होते हैं। इसका कारण वहां अभी भी सेना भर्ती को लेकर जानकारी का अभाव है।

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