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जल संकट की आहट, शिप्रा से फिर पानी लेने की योजना

7 वर्ष पहले
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उज्जैन। गंभीर में तेजी से कम हो रहे पानी को देखते गरमी में फिर शिप्रा से जलप्रदाय की जरूरत पड़ सकती है। इसलिए शिप्रा के पानी को सहेजने के लिए महापौर परिषद ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। शुक्रवार को हुई बैठक में परिषद ने गंभीर डेम से पानी की चोरी पर रोक लगाने के लिए संभागायुक्त और कलेक्टर से चर्चा करने के लिए कहा। महापौर रामेश्वर अखंड का कहना था कि पीएचई अधिकारी पेयजल व्यवस्था को लेकर गंभीर नहीं हैं। यही ढर्रा रहा तो सिंहस्थ में यात्रियों को प्यासा रहना पड़ेगा। हम कैसे सिंहस्थ करेंगे।
महापौर निवास स्थित सभागृह में आयोजित एमआईसी की बैठक में बताया गया कि गंभीर डेम में तीन महीने तक जलप्रदाय जितना पानी बचा है। ऐसी स्थिति में जलप्रदाय की नई व्यवस्था करना जरूरी है। समय रहते यदि योजना नहीं बनाई तो स्थिति बिगड़ सकती है।
ऐसी व्यवस्था करना होगी कि आगामी बारिश तक जल संकट की स्थिति बने। सिंहस्थ 2016 को देखते हुए भी योजना बनाने की जरूरत है। जलकार्य समिति प्रभारी प्रकाश शर्मा ने शिप्रा से जलप्रदाय की व्यवस्था बनाने का सुझाव दिया। महापौर ने आयुक्त अविनाश लवानिया को योजना बनाने के निर्देश दिए। गौरतलब है कि शिप्रा में इंदौर की खान दी का प्रदूषित पानी आने से शिप्रा से जलप्रदाय बंद कर दिया गया है।
ये प्रस्ताव मंजूर :
- कमरी मार्ग और आगररोड के 36 मुआवजा प्रकरणों को मंजूरी।
- तोपखाना में उपकेश्वर चौराहे पर कांक्रीट रोड बनेगा।
- वार्ड 20 में मिर्चीनाला पर जिम्नेशियम हॉल का निर्माण।
- भैरवगढ़ भरतपुरी टंकी पर संपवेल निर्माण।
- रुद्रसागर विष्णु सागर का सौंदर्यीकरण।
- गऊघाट से त्रिवेणी विहार और चिंतामन तक नई पाइप लाइन।
- कर्मचारियों को सात प्रतिशत महंगाई भत्ता।
नयाबजट पेश किया
महापौर परिषद में कहा- ऐसे कैसे सिंहस्थ होगा, कलेक्टर से पानी चोरी रोकने के लिए चर्चा करेंगे
आयुक्त ने महापौर परिषद में निगम का वर्ष 2015-16 का बजट पेश किया। बजट पर महापौर परिषद मंथन कर निगम परिषद में अपने सुझावों के साथ बजट रखेगी। बजट फरवरी 15 तक निगम परिषद में पारित करने का प्रयास है। इससे मौजूदा पार्षदों को नए बजट से अपने वार्डों में काम कराने का मौका मिलेगा।
रुद्रसागर पर नगर निगम फिर 10 करोड़ रु. खर्च करेगा। महापौर परिषद ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। यह राशि सिंहस्थ मद से मिलने वाली है। गौरतलब है कि रुद्रसागर के गंदे नाले के पानी की निकासी के लिए निगम 4.5 करोड़ रु. की पाइप लाइन डाल चुका है।
इंदिरानगर तालाब की जमीन लेने का प्रस्ताव : सीएम की घोषणा अनुसार स्वीमिंग पूल के लिए इंदिरानगर में तालाब की जमीन लेने पर मंथन किया। यहां पुराना तालाब होने की जानकारी मिली है। यदि जमीन तालाब की पाई जाती है तो निगम दूसरी जमीन तलाश करेगा। सांदीपनि नगर निगम को हस्तांतरित करने पर भी चर्चा की

12साल बाद याद आई देवासगेट की दुकानें: देवासगेटबस स्टैंड पर बनाई गई दुकानों को आवंटित करने का विचार 12 साल बाद निगम को आया है। यह दुकानें बस स्टैंड की बाउंड्री वाल से लग कर बनाई गई थी। इनका आवंटन नहीं हो सका था।

एमआईसी के अधिकार नहीं दे सकते : सिंहस्थ और अन्य निर्माण विकास कार्यों की दर स्वीकृति का एमआईसी का अधिकार किसी को नहीं दिया जा सकता। कानून में ऐसा प्रावधान नहीं है। आयुक्त ने प्रस्ताव दिया था कि एमआईसी की बैठक तक निर्माण कार्यों की दर स्वीकृति के लिए इंतजार करना पड़ता है। यदि अधिकारी आयुक्त को दे दिया जाए तो काम आसान होगा। बाद में मामलों को एमआईसी में प्रस्तुत कर पुष्टि की जा सकती है। महापौर ने कहा ऐसा नपा अधिनियम में ऐसा प्रावधान नहीं है। इस पर आयुक्त ने प्रस्ताव वापस ले लिया।
इसलिए पानी की चिंता : उज्जैन नगर निगम के चुनाव जुलाई 2015 में होने की संभावना है। गंभीर का पानी जल्दी खत्म हो जाता है तो मई, जून में जल संकट का सामना शहर को करना पड़ेगा। इसका असर चुनाव नतीजों पर हो सकता है। नागरिकों की नाराजगी से बचने के लिए मौजूदा परिषद चुनाव के पहले जल संकट की स्थिति निर्मित नहीं होने देना चाहती।

आयुक्त ने बुलाई पीएचई की बैठक: जलसंकट की आशंका के चलते आयुक्त लवानिया ने 15 दिसंबर को दोपहर 12 बजे निगम मुख्यालय में पीएचई के सभी अधिकारियों की बैठक बुलाई है। इसमें जलप्रदाय व्यवस्था और संभावित जल संकट को लेकर विचार विमर्श किया जाएगा। इधर गुरुवार-शुक्रवार की दरमियानी रात चकोर पार्क टंकी की पाइप लाइन फूट जाने से शुक्रवार सुबह जलप्रदाय नहीं हो सका। पीएचई अधिकारी पाइप लाइन सुधार की कोशिश में जुटे रहे।

रुद्रसागर पर फिर 10 करोड़ रु. खर्च होंगे

(बैठक को संबोधित करते महापौर अखंड। समीप हैं आयुक्त लवानिया अन्य जनप्रतिनिधि।)