उज्जैन। चौधरी ने सितार पर जैसे ही तान छेड़ी, बाहर बारिश शुरू हो गई। लोगों ने तालियों से उनका स्वागत किया। उनके साथ तबले पर उज्जैन के पं. हिमांशु महंत ने संगत की। संत सुमन भाई ने कहा जब प्रतीक चौधरी श्रावण के महीने में उज्जैन के महाकाल में प्रस्तुति देने आए थे तो पानी नहीं बरसा और अब गंगाघाट पर पौष में बारिश हो रही है। मुखर्जी ने कथक में शिव की स्तुति के साथ एक के बाद एक कई प्रस्तुतियां दी। पहले दिन के समारोह का समापन मुंबई के जसवंत सिंह के गायन से हुआ। सांस्कृतिक संध्या का संचालन एडवोकेट कैलाश विजयवर्गीय ने किया। सांदीपनि कृष्ण पुरस्कार, संस्कृत अंताक्षरी के विजेताओं को पुरस्कृत नहीं किया जा सका। बारिश होने से विजेता नहीं पाए। सुदामा निधि सामग्री वितरण सहित सभी शनिवार को सम्मानित होंगे।
पंचनाद, सोमा घोष का गायन % जन्मोत्सवमें शनिवार को विद्यापीठ अधिवेशन में उद्बोधन-सम्मान के साथ शाम को 7.30 बजे से महिलाओं के ग्रुप का पंचनाद कार्यक्रम मुंबई की डॉ. सोमा घोष का गायन होगा। आश्रम के बीएल मेहता ने बताया मौन तीर्थ कला साधक सम्मान सरल ज्ञानी, राजेंद्र आर्य, छगनलाल शिवालिया, शकील गुट्टी, विजेंद्र, मानसश्री सम्मान मंडला के डॉ. खरे, राजस्थान के जमनालाल इलाहाबाद की आकांशा यादव को दिया जाएगा।
गंगाघाट पर मौनी बाबा जन्मोत्सव| प्रतीक चौधरी की तान सुन अनुप्रिया का नृत्य देख श्रोता मंत्रमुग्ध
मंगलनाथ मार्ग स्थित मौन तीर्थ गंगाघाट पर शुक्रवार शाम श्री मौनी बाबा का स्वर्ण जयंती महोत्सव शुरू हुआ। बरसते पानी के बीच सितार वादन और कथक नृत्य ने समा बांध दिया। रात करीब 8.30 बजे दिल्ली के पं. प्रतीक चौधरी ने गंगाघाट स्थित चित्रकूट मंच से सितार वादन से कार्यक्रम की शुरुआत की। मुंबई की अनुप्रिया मुखर्जी ने आकर्षक कथक नृत्य से उपस्थित श्रोताओं को मंत्र मुग्ध किया।
विद्यापीठ का अधिवेशन, सम्मान लेने आए गुजरात सीएम के पति
गंगाघाटपर शुक्रवार सुबह 11 बजे विक्रम शिला हिंदी विद्यापीठ का अधिवेशन शुरू हुआ। प्रमुख रूप से गुजरात की मुख्यमंत्री आनंदीबेन के पति मफतलाल जेठाभाई पटेल शामिल हुए। वे आनंदीबेन को दिए जाने वाले विद्या वाचस्पति सम्मान लेने आए हंै। अधिवेशन को सुमन भाई, डॉ. तेजनारायण कुशवाह, देवेंद्र शाह आदि ने संबोधित कर हिंदी को बढ़ावा देने पर जोर दिया। प्रतिभा नृत्य अकादमी के कलाकारों ने सांस्कृतिक प्रस्तुति दी। संचालन पद्मजा रघुवंशी ने किया। देशभर के 300 से अधिक विद्वान जुटे।