ननि में फिर अधीक्षण यंत्री विवाद
नगरनिगम में फिर अधीक्षण यंत्री विवाद खड़ा हो गया है। आयुक्त अविनाश लवानिया ने शुक्रवार को आदेश जारी कर अधीक्षण यंत्री वीके सोनी से सभी काम ले कर कार्यपालन यंत्री रामबाबू शर्मा को प्रभारी अधीक्षण यंत्री बना दिया है।
निगम में यह स्थिति दूसरी बार आई है जब अधीक्षण यंत्री के रहते प्रभारी अधीक्षण यंत्री बनाया गया है। इसके पहले तत्कालीन आयुक्त विवेक श्रोत्रिय ने भी वीके सोनी से महत्वपूर्ण कार्य लेकर रामबाबू शर्मा को प्रभारी अधीक्षण यंत्री बनाया था। अधीक्षण यंत्री कक्ष में दोनों कुर्सी लगा कर बैठ रहे थे। बाद में यह आदेश वापस ले लिया गया था। सोनी पीएचई से प्रति नियुक्ति पर 23 जनवरी 13 को नगर निगम में एक साल के लिए अधीक्षण यंत्री पदस्थ किए गए थे। 18 मार्च 13 को इनकी प्रतिनियुक्ति वापस ले ली गई जिस पर उन्हें कार्यमुक्त कर दिया गया लेकिन 15 जनवरी 14 को आदेश निरस्त होने पर सोनी फिर निगम में पदस्थ हो गए और अब तक कार्यरत हैं।
आयुक्त ने शुक्रवार को जारी आदेश में लिखा है कि सोनी की कार्यप्रणाली निगम जनहित में नहीं होने से एवं सिंहस्थ 2016 के महत्वपूर्ण कार्य समय सीमा में पूर्ण हो सके इसके लिए सोनी को सौंपे गए समस्त अधिकार वापस ले कर रामबाबू शर्मा को प्रभारी अधीक्षण यंत्री बनाया है। सोनी ने इस आदेश को लेकर कहा है कि मैं फिर इसकी लड़ाई लडूंगा प्रतिनियुक्ति दो साल के लिए होती है जो फरवरी 15 में पूर्ण होगी। इस बीच सात महीने तक निगम ने कार्यमुक्त रखा ये अवधि भी जुड़ेगी यानी सितंबर 15 तक मैं निगम में कार्यरत हूं। चेंबर अधीक्षण यंत्री का है, इसलिए मैं ही इसमें बैठूंगा। सोनी ने कहा है कि मैं आपत्ति के साथ यह आदेश लूंगा। इधर शर्मा ने कहा है कि आयुक्त के आदेश का पालन करूंगा।