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गोवर्धन पुरुषोत्तम सागर का होगा विकास, 25 कब्जेधारियों को नोटिस

6 वर्ष पहले
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सिंहस्थके मद्देनजर शहर के प्राचीन सप्त सागरों में से पुरुषोत्तम सागर के विकास की भी योजना है। नगर निगम ने 4 करोड़ 41 लाख 80 हजार रुपए की डीपीआर भी तैयार की है। काम शुरू होने में बड़ी अड़चन इन सागरों की भूमि पर अवैध कब्जे के है। जिसे हटाने के लिए प्रशासन ने तैयारी शुरू कर दी है। गोवर्धन सागर का भी विकास प्रस्तावित है। गोवर्धन सागर से कब्जा हटाने के लिए 25 लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं।

गोवर्धन और पुरुषोत्तम सागरों की प्रारंभिक पड़ताल में प्रशासन ने पाया है कि दोनों सागरों की जमीन पर लोगों का अवैध कब्जा हैं। पुरुषोत्तम सागर पूरी तरह सरकारी किए जाने को लेकर नगर निगम आयुक्त अविनाश लवानिया ने कलेक्टर कवींद्र कियावत को पत्र लिखा है जबकि गोवर्धन सागर के मामले में अपर कलेक्टर (नजूल) कोर्ट ने बुधवार को 25 कब्जेधारियों के खिलाफ नोटिस जारी किए। कब्जेधारियों को 24 फरवरी सुबह 11 बजे तक की तारीख दी गई है। नोटिस में अपर कलेक्टर पवन जैन ने स्पष्ट किया है कि तारीख से अनुपस्थित होने की स्थिति में कब्जे तोड़े भी जा सकते हैं। गोवर्धन सागर मामले में अपर कलेक्टर नजूल कोर्ट द्वारा जारी नोटिस में जिक्र किया है कि सरकारी अभिलेखों में 56 बीघा 18 बिस्बा गोवर्धन सागर की भूमि उर्फ निकास के नाम से दर्ज है। मिसल बंदोबस्त उक्त भूमि सरकार की मिल्कियत हैं। पुरुषोत्तम सागर मामले में कलेक्टर कियावत को भेजे गए पत्र में नगर निगम आयुक्त लवानिया ने जिक्र किया है कि पुरुषोत्तम सागर की 7.963 आरे भूमि पर भूरा भोई के नाम स्वत्व दर्ज है बंदोबस्त रिकार्ड में यह भूमि सरकारी घोषित की जाए।

गोवर्धनसागर में इन्हें नोटिस: बंशीलाल,अनिल जोशी, चांदमल पारख, मोहनलाल नागर, मोहनलाल नीमा, गोपाल नागर, बिट्ठलदास गुप्ता, अशोक गुप्ता, बंशीलाल गुप्ता, गोपाल नागर, शैलेंद्र पारख, सत्यनारायण कटलाना, गिरधर गोपाल नीमा, शकुंतलाबाई नीमा, प्रेमनारायण नागर, अशोक जैन, आशा जैन, ईश्वरदास, लक्ष्मणदास, गोवर्धनदास, ईश्वरदास, कन्हैयालाल, मन्नूलाल, भानूशाली गृह निर्माण समिति अध्यक्ष ईश्वरदास।

बुधवारिया स्थित गोवर्धनसागर।

^गोवर्धन सागर पर कब्जे के मामले में 25 कब्जेधारियों के खिलाफ नोटिस विज्ञप्ति जारी की गई है। पक्ष प्रस्तुत किए जाने के लिए सभी को 24 फरवरी तारीख दी गई हैं। अनुपस्थिति के एवज में एक पक्षीय कार्रवाई की जा सकती है। -पवनजैन, अपर कलेक्टर (नजूल)

^पुरुषोत्तमसागर की जमीन शासकीय घोषित किए जाने के लिए कलेक्टर को पत्र लिखा गया है। सिंहस्थ योजना में इस सागर के विकास कार्य भी प्रस्तावित है। इसके लिए साढ़े चार करोड़ की डीपीआर तैयार कर ली गई है। -अविनाशलवानिया, आयुक्त नगर निगम

वर्तमान स्थिति



पूरीतरह बर्बाद हुआ। विकास के नाम पर बेतरतीब निर्माण हुए, अवैध कब्जे हैं, कई बार सागर की सूखी जमीन पर कब्जेधारियों ने प्लॉट तक काटकर कौडि़यों के मोल बेच दिए।



अब सागर के नाम पर केवल बावड़ी बची है, वह भी उजाड़। आसपास घनी बस्ती है, जिसे किसी भी सूरत में शिफ्ट नहीं किया जा सकता।





50 साल पहले क्षीरसागर कॉलोनी बनी और तालाब लगातार सिकुड़ता गया। आज एक छोटे से कुंड के रूप में नाममात्र का बचा है। आसपास कब्जे बने हुए हैं।



कब्जेधारियों के हवाले हो गया। कई बार जमीन बिकी और जिम्मेदार सोते रहे। व्यापारियों का मार्केट भी बन गया। सबके पास अधिकार को लेकर अपने-अपने तर्क और कागजात हैं।



लगभग समाप्त सा। आसपास कब्जे हुए हैं। बारिश में पानी रहता है लेकिन सागर की गरिमा गायब है।







पिछले साल हुए विकास के बाद संवरा है। आसपास मंदिरों की पूरी शृंखला के कारण इसका सौंदर्य लौटा है। हालांकि परंपरागत तालाब अब सिकुड़ चुका है।



लगातार सिकुड़ता गया। 50 साल पहले बसाहट शुरू हुई और धीरे-धीरे कब्जे में तब्दील होती गई। अब केवल नाममात्र का है।

महत्व



सप्तसागर यात्रा इसी सागर से शुरू होती है। शंकर के कृपाल से उत्पन्न होने से इसका नाम रुद्र सागर पड़ा। पुराने समय में इस सागर के जल से ही भगवान महाकालेश्वर का अभिषेक होता था।



ब्रह्मा और सावित्री का पूजन होने से इस सागर का नाम ब्रह्म तीर्थ पुष्कर पड़ा। पहले यहां विशाल सागर हुआ करता था लेकिन वर्तमान में बावड़ी के रूप में विद्यमान। लोग बावड़ी किनारे बैठकर ही पूजन-अर्चन करते हैं।



भगवान विष्णु क्षीरसागर में शेषशाही स्वरूप में विराजमान है। इस सागर पर विष्णु के शेषशाही रूप का पूजन होने से इसका नाम क्षीरसागर पड़ा। लोग इस सागर का पूजन कर खीर का दान करते हैं।



इस सागर पर भगवान कृष्ण की गोवर्धन पर्वत उठाते प्राचीन प्रतिमा के दर्शन होते हैं। इसलिए इसका नाम गोवर्धन सागर पड़ा। महिलाएं यहां दीपावली पर होने वाली गोवर्धन पूजा के लिए उमड़ती है।



शंकर-पार्वती का पूजन कर सौभाग्य सामग्री एवं र| चढ़ाने का महत्व होने से इस सागर का नाम र|ाकर सागर पड़ा। पुराने समय में इस सागर का जल आसपास के गांवों में पीने के उपयोग में लिया जाता था।



इस सागर पुर पुराण वाचन का महत्व होने से इसका नाम पुराण स्वरूप भगवान विष्णु के नाम से विष्णु सागर पड़ा। यहां श्रद्धालु विष्णु की पीतल की प्रतिमा का दान भी करते हैं।





सप्त सागर यात्रा इसी सागर पर समाप्त होती है। पुराणों में इसका नाम पुरुषोत्तम है। पुराने समय में इस सागर के पानी से खेतों में सिंचाई हुआ करती थी। 16 जगह पानी खिंचने के स्थान बने होने से बाद में लोग इसे सोलह सागर के नाम से जानने लगे।

नाम



रूद्रसागरकहां-हरसिद्धिमंदिर के पास



पुष्कर सागर

कहां-नलियाबाखल







क्षीरसागर कहां-नईसड़कके पास



गोवर्धनसागर कहां-बुधवारिया



र|ाकर सागर कहां-उंडासा



िवष्णु सागर कहां-रामजनार्दन मंदिर



पुरुषोत्तम सागर कहां-इंदिरानगरके पास