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सेवा का मजहब नहीं, सिंहस्थ के लिए मुस्लिम समाज भी उत्साहित

5 वर्ष पहले
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सेवा का कोई धर्म या मजहब नहीं है। बस लोगों के जेहन में इंसानियत का जज्बा बना रहना चाहिए। सिंहस्थ पूरे शहर का आयोजन है। हर वर्ग, समाज आैर धर्म के लोग इसमें कंधे से कंधा मिलाकर एकदूसरे का साथ देने में पीछे नहीं रहेंगे। सिंहस्थ में इसी संदेश के साथ उज्जैन पूरी दुनिया के सामने सांप्रदायिक एकता की भी मिसाल पेश करेगा। श्रद्धालुओं की सेवा आैर सत्कार के लिए मुस्लिम समाज भी तैयार हो चुका है।

अप्रैल-मई में भीषण गर्मी होती है, ऐसे में मुस्लिम समाजजन अनेक स्थानों पर प्याऊ लगाकर श्रद्धालुओं की प्यास बुझाएंगे तो दूसरी तरह अपने घरों में भी मेहमानों को ठहरा कर उनका सत्कार करेंगे। आने-जाने वाले श्रद्धालुओं का मार्ग प्रशस्त करने के अलावा किसी भी तरह की मदद के लिए समाजजन तैयार रहेंगे।

मैदानी स्तर पर अमलीजामा पहनाने की कवायद
मुस्लिम समाजजनों की ओर से कुछ दिनों पहले सिंहस्थ में सेवा कार्य करने के लिए शहर स्तर पर एक बैठक का भी आयोजन किया जा चुका है। इसमें सामाजिक क्षेत्रों में कार्य कर रहे संगठनों के प्रमुखों ने ही हिस्सेदारी की। बैठक में सेवा कार्यों का खाका लगभग तैयार हो चुका है। अब मैदानी स्तर पर इसे अमलीजामा पहनाने की कवायद है। समाजजनों से अपील की है कि वे सिंहस्थ के दौरान श्रद्धालुओं की मदद आैर सेवा की भावना से कार्य करने में सहयोग करें। जल्द ही एक अन्य बैठक के बाद इसकी अधिकृत घोषणा की जा सकती है।

मस्जिदों से दिया जाएगा समाजजनों को संदेश
लखेरवाड़ी मस्जिद के इमाम रहे हाफिज मोहम्मद रईस खान ने बताया काजी साहेब के नेतृत्व में हम मिलकर कार्य करेंगे। मानवता के नजरिए से सिंहस्थ में आने वाले हर मेहमान की खातिरदारी करना शहरवासियों का फर्ज है। मस्जिदों से भी इस तरह का संदेश समाजजनों को दिया जाएगा। जामा शकेब मस्जिद के इमाम हाफिज मोहम्मद तैय्यब साहेब ने बताया सिंहस्थ में सेवा के लिए शहर स्तर पर बैठक हो चुकी है। जल्द ही इसे अमलीजामा पहनाया जाएगा। समाजजन पूरे जज्बे के साथ सेवा कार्य करेंगे।

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