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नए औद्योगिक क्षेत्र ताजपुर में होंगे 100 से अधिक उद्योग
स्मार्ट
उज्जैन
पोहे के कारोबार को लेकर छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में विसंगतियां हैं। इन विसंगतियों के कारण व्यापार में हुए नुकसान की वजह से उज्जैन में एक साल के भीतर पोहे की करीब 10 फैक्टरियां बंद हो चुकी है। दरअसल पोहा धान से बनाया जाता है। प्रदेश में धान की पैदावार के बराबर है, जबकि छत्तीसगढ़ को देश में धान के कटोरे के रूप में भी पहचाना जाता है। विसंगतियों के तहत छत्तीसगढ़ में पोहा फैक्टरी होने पर वहां का व्यापारी छत्तीसगढ़ से धान खरीदता हैं तो उसे मंडी टैक्स नहीं देना होता है। वह यदि पोहे को मप्र में भेजता है, तब भी उसे कोई टैक्स नहीं देना होता है, जबकि छत्तीसगढ़ से धान खरीदने पर प्रदेश के व्यापारी को वहां 6 प्रतिशत मंडी टैक्स देना होता है। वहीं प्रदेश में भी संबंधित मंडी का 2 प्रतिशत टैक्स देना होता है, जिस पर 8 प्रतिशत टैक्स का भार होने पर पोहा उद्योग का ग्राफ नीचे भी गिर रहा है।
विसंगति: एक साल में पोहे की 10 फैक्टरियां बंद
नए औद्योगिक क्षेत्र पर एक नजर
मिल सकते ये उद्योग
पोहा,प्लास्टिक, दाल, आटा आिद
शुरुआत हो सकती
सितंबर2015 से
विकास कार्य
40करोड़ से
कुल एरिया
88हेक्टेयर से अिधक
कहां
ताजपुरके समीप
^ताजपुर औद्योगिक क्षेत्र को पोहा क्लस्टर के तौर पर भी विकसित किया जा रहा है। 88 हेक्टेयर से अधिक भूमि पर 100 से अधिक उद्योग स्थापित हो सकेंगे। पोहे की 40 से अधिक इकाइयों की प्रबल संभावनाएं हैं। 40 करोड़ की लागत से होने वाले विकास कार्यों की शुरुआत कर दी गई।\\\'\\\' धीरेंद्रसिंहचतुर्वेदी, प्रबंधसंचालक एकेवीएन
दिल्ली- हरियाणा की पसंद उज्जैन का पोहा
मिलीजानकारी के अनुसार शुरुआती दौर से उज्जैन का पोहा प्रदेश के साथ महाराष्ट्र और राजस्थान में पसंद किया जाता रहा है लेकिन अब यहां का पोहा दिल्ली, हरियाणा, उत्तराखंड, पंजाब सहित दक्षिण भारतीय इलाकों में पसंद किया जाने लगा है। मक्सीरोड, नागझिरी आगर रोड स्थित औद्योगिक क्षेत्र में स्थित करीब 32 फैक्टरियों में रोजाना 400 क्विंटल से अधिक पोहा बनता है।