समारोह आगे बढ़ाने पर फूटा गुबार
अभाकालिदास समारोह को आगे बढ़ाए जाने के संस्कृति विभाग के निर्णय को लेकर सोमवार सुबह स्थानीय समिति की बैठक में सदस्यों का गुबार फूट पड़ा।
कालिदास अकादमी स्थित अभिरंग नाट्यगृह में सुबह 11 बजे स्थानीय समिति की बैठक शुरू हुई। अध्यक्षता संभागायुक्त डॉ. रवींद्र पस्तौर ने की। बैठक शुरू होते ही सदस्यों ने देव प्रबोधिनी एकादशी (3 नवंबर) से शुरू होने वाले समारोह को आगे बढ़ाए जाने पर कहा परंपरानुसार देव प्रबोधिनी एकादशी पर ही समारोह शुरू किया जाना चाहिए। बैठक में सहमति बनी कि संवैधानिक कारणों को छोड़कर अन्य कारण से समारोह आगे बढ़ाया जाए। बैठक में समारोह में होने वाली प्रस्तुतियों सहित अन्य मुद्दों पर चर्चाएं हुई। संचालन उपनिदेशक शशिरंजन अकेला ने किया। सिंहस्थ प्राधिकरण अध्यक्ष दिवाकर नातू, अकादमी के प्रभारी निदेशक डॉ. पीके झा, विक्रम विवि के कार्यवाहक कुलपति डॉ. एमएस हाड़ा, कलेक्टर कवींद्र कियावत, एसपी एमएस वर्मा, निगमायुक्त अविनाश लवानिया मौजूद थे।
इनमुद्दों पर मंथन :- प्रस्तावोंपर मंथन के लिए एक कमेटी गठित करने की मांग उठी, जिस पर संभागायुक्त कलेक्टर ने भी सहमति देते हुए स्थानीय विद्वानों संबंधित विधा विशेषज्ञ की उप समितियां बनाने के निर्देश दिए। यह समिति मंगलवार को प्राप्त प्रस्तावों में से योग्यता के आधार पर कलाकारों के प्रस्तावों का चयन कर सुझाव केंद्रीय समिति को विचारार्थ प्रस्तुत करेगी। > व्यंग्यकार डॉ. पिलकेंद्र अरोरा ने सुझाव रखा कि समारोह की गरिमा के अनुरूप प्रस्तुतियां हों। अनुपम खेर की प्रस्तुति में अश्लील संवादों आैर कैलाश खेर की प्रस्तुति में फिल्मी गीतों के प्रयोग पर आपत्ति लेते हुए डॉ. अरोरा ने कलाकारों की प्रस्तुतियों से पहले उनकी स्क्रिप्ट प्रस्तुति की जांच करने की भी बात कही। > बैठक में शिकायत आई कि समारोह के एक दिन पहले निकलने वाली कलश यात्रा में बच्चों को शामिल किया जाता है लेकिन उनके लिए पीने के पानी तक की व्यवस्था नहीं की जाती। कलेक्टर कियावत ने निर्देश दिए कि कलश यात्रा में केवल हाईस्कूल आैर हायर सेकंडरी स्कूल के विद्यार्थियों को ही यात्रा में शामिल किया जाए। > शुभारंभ आैर समापन के लिए नोबल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी, वरिष्ठ विद्वान डॉ. कमलेश दत्त त्रिपाठी सहित अन्य नामों के प्रस्ताव आए, जिन्हें केंद्रीय समिति में रखे जाने का निर्णय लिया गया।