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अगले जनम मोहे बिटिया कीजो

6 वर्ष पहले
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अगलेजनम मोहे बिटिया कीजो। टीवी सीरियल में बेटियों का ये दर्द भले ही नाटकीय हो लेकिन पालनागृह में तीन बेटियां ये दर्द शिद्दत से महसूस कर रही हैं।

पालनागृह में अपनों से ठुकराई तीन बेटियां परिजन से मिलने के लिए बेकरार हैं। डेढ़ साल की चांदनी और उससे बड़ी 3 साल की प्रिया तो अपना दर्द शब्दों में नहीं बयां कर सकती लेकिन सबसे बड़ी 5 वर्ष की ऐश्वर्या का दर्द उसके शब्दों में झलकता है। भास्कर संवाददाता से ऐश्वर्या कहती है-‘मम्मी, पापा, दादी, बुआ सबकी याद आती है। कोई भी लेने नहीं आता। सब कहते हैं बेटी हैं इसलिए यहां छोड़ दिया।’

9महीने में कोई मिलने नहीं आया

नौमहीने से तीनों बेटियां पालना गृह में हैं। पालना गृह संचालक रितेश श्रोत्रिय ने बताया इस दौरान बच्चियों से मिलने कोई नहीं आया। हम चाहते हैं परिजन इन्हें अपना लें। हमने 6 जनवरी को बाल कल्याण समिति मंदसौर को पत्र लिखकर मार्गदर्शन मांगा था, अब तक जवाब नहीं अाया। ऐश्वर्या के मन में घर लौटने की तड़प है। वह मम्मी, पापा, दादी और बुआ सभी को याद करती है।

गुस्से में बेटी को पटका था, मां जेल में

बच्चियोंकी मां पंचकूला महाराष्ट्र की है। मंदसौर के कुचड़ौद गांव में सत्यनारायण कुमावत ने उससे दूसरा विवाह किया। ऐश्वर्या पहले पति की बेटी थी। सत्यनारायण से शादी के बाद दूसरी बेटी प्रिया को जन्म दिया। इसके बाद पति-प|ी में झगड़े बढ़े। पंचकूला ने पति के खिलाफ प्रकरण दर्ज कराया कि बेटा नहीं होने पर उसे प्रताड़ित किया जाता है। पति को जेल जाना पड़ा। पंचकूला का घर छूट गया। कुछ दिन नारी निकेतन उज्जैन में रहने के बाद वह महिला आश्रम मंदसौर गई। इसी बीच उसने तीसरी बेटी चांदनी को जन्म दिया। आरोप है यहां पंचकूला ने 6 महीने की चांदनी को गुस्से में जमीन पर पटक दिया। हत्या के प्रयास का प्रकरण बना और उसे जेल भेज दिया। मां के जेल जाने के बाद बाल कल्याण समिति मंदसौर ने 27 मई 2014 को बच्चियों को पालनागृह भेज दिया।

पालना गृह में प्रिया, चांदनी और ऐश्वर्या। फोटो-नयन डागा

मार्गदर्शन मांगा है

^बच्चियोंकी मां का प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन है। हमने न्यायालय से मार्गदर्शन मांगा है। बच्चियों के माता-पिता जीवित हैं। इसलिए उन्हें गोद देने की प्रक्रिया नहीं की जा सकती। -देशबंधुआर्य, सदस्य बाल कल्याण समिति, मंदसौर