महामंडलेश्वर बताकर ली जमीन, निर्मल अखाड़े ने आपत्ति लेकर की शिकायत
निर्माण कार्य देखते निर्मल अखाड़े के संत बलवंतसिंह।
भास्कर संवाददाता | उज्जैन
दिल्ली के संत भक्त हरि महाराज ने अपने आप को निर्मल अखाड़े का महामंडलेश्वर बताकर अपने नाम से बड़नगर रोड पर जमीन आवंटित करवा ली और भूमिपूजन भी कर दिया लेकिन भक्त हरि न अखाड़े से जुड़े और न अब अखाड़े के महामंडलेश्वर हैं। अखाड़े ने सिंहस्थ मेला कार्यालय में अापत्ति लेकर अधिकारियों को लिखित शिकायत की है।
यह बात गुरुवार को हरिद्वार से उज्जैन आए निर्मल अखाड़े के सचिव महंत बलवंत सिंह ने पत्रकारों से चर्चा में कही। उन्होंने कहा भक्त हरि महाराज को जमीन आवंटित करने में कोई दिक्कत नहीं है लेकिन अधिकारियों ने बिना जांच-पड़ताल के ही उन्हें अखाड़े के महामंडलेश्वर के नाम से जमीन दे दी, जबकि वे अब अखाड़े के महामंडलेश्वर ही नहीं हैं। अखाड़े के स्थानीय महंत ने मेला अधिकारी को लिखित शिकायत कर जमीन उनके अखाड़े के नाम आवंटित करने काे कहा है। मेला प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते जांच कमेटी बनाई, जो अब इस कार्य में जुट गई है कि आखिर दोनों में से कौन सच बोल रहे हैं। दोपहर में सचिव बलवंत सिंह ने प्रशासनिक अधिकारियों से भी मुलाकात कर सिंहस्थ संबंधी प्रमुख समस्याएं बताई। अखाड़े के पुरोहित पं. रामाकांत जोशी भी मौजूद थे। इस संबंध में भक्त हरि महाराज से चर्चा करना चाही लेकिन वे उपलब्ध नहीं हो सके।
काम नहीं हुए, जो चल रहे वे अधूरे
सचिव बलवंत सिंह बोले-सरकार की ओर से 13 अखाड़ों में 1-1 करोड़ के निर्माण कराने की बात कही गई थी। कलेक्टर-मेला अधिकारी ने निरीक्षण में भी इसका जिक्र किया था। बावजूद अखाड़े में सिर्फ सड़क बनी। भवन निर्माण अधूरा है। पक्की छत की जगह पतरे डालने की तैयारी है। नोडल अधिकारी एसएन मिश्रा ने उन्हें बताया वे तो जो आदेश मिला है उतना निर्माण करेंगे।
महामंत्री दूसरे अखाड़े का हो
महंत ने कहा अखाड़ा परिषद अध्यक्ष नरेंद्र गिरि महाराज योग्य संत हैं लेकिन महामंत्री का पद हरिगिरि महाराज की जगह किसी अन्य अखाड़े के महंत को देना चाहिए क्योंकि अध्यक्ष और महामंत्री दोनों शैव अखाड़े से संबंधित है, जबकि 13 अखाड़ों में उदासीन व वैष्णव का भी अपना महत्व है।
भक्त हरि महाराज के जमीन आवंटन को लेकर निर्मल अखाड़े की ओर से लिखित शिकायत प्राप्त हुई है। प्रशासन इसकी जांच कराएंगे । यदि आवंटन गलत हुआ है तो उचित कार्रवाई करेंगे। अनिल पटवा, सिंहस्थ उप मेला अधिकारी