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8 दिन का समय मांगा और डेढ़ माह से सामग्री खरीदी की जांच अटक गई

6 वर्ष पहले
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जिलेके स्वास्थ्य केंद्रों के लिए खरीदी गई करीब 20 लाख की सामग्री के मामले में सीएमएचओ डॉ.अशोक यादव द्वारा जिला प्रशासन से आठ दिन का समय मांगे जाने के बाद से जांच अटक गई है। डेढ़ माह में भी जांच परिणाम तक नहीं पहुंचा पाई है।

सीएमएचओ(मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी) ने स्वास्थ्य केंद्रों के लिए बेंडेज,पर्दे सहित अन्य सामग्री की खरीदी की थी। उन्होंने 22 दिसंबर को सामग्री ट्रक में भरवा कर जिला अस्पताल परिसर में स्थित सीएमएचओ स्टोर में भिजवा दी थी,साथ ही सीएमएचओ स्टोर में फोन लगाकर कहा था कि सामान उतरवा लेना। दूसरे दिन 23 दिसंबर को वे खुद बिल की इंट्री सीएमएचओ स्टोर्स में करवाने के लिए पहुंचे थे। स्टोर कीपर संजय जोगलेकर ने इससे इंकार कर दिया। उनका कहना था कि तो हमारे पास इसका आदेश क्रमांक है और आदेश की प्रति। कौन से हेड से इसकी खरीदी की गई है,यह भी पता नहीं हैं।

चार-पांच दिन के बिल चढाएं जाना है,सामग्री का मूल्य उसकी गुणवत्ता को देखने के बाद ही यह बिल चढ़ाया जा सकता है। लेकिन सीएमएचओ इस जिद में थे कि पहले इस बिल को बढ़ाया जाए। इसके बाद सीएमएचओ डॉ.यादव ने तत्काल जोगलेकर को स्टोर कीपर के प्रभार से हटा दिया था। स्टोर कीपर का प्रभार इंगोरिया में कम्पाउंडर के पद पर पदस्थ विजय गोलघाटे को दे दिया। बताया जाता है कि इंदौर बुरहानपुर से यह खरीदी की गई है। क्रय समिति के अध्यक्ष कलेक्टर होते हैं,उन्हें भी पता नहीं है कि सीएमएचओ ने 20 लाख के सामान की खरीदी की है। कलेक्टर के आदेश पर अपर कलेक्टर स्वास्थ्य विभाग के नोडल अधिकारी कैलाश बुंदेला ने जांच शुरू की। सीएमएचओ से उन्होंने जवाब मांगा तो उन्होंने आठ दिन का समय मांग लिया,उसके बाद से जांच अटकी हुई है। जांच परिणाम तक नहीं पहुंचने से सवाल खड़े हो रहे हैं।

यहसामग्री खरीदी गई

बेंडेज,पर्दे, कवर, एप्रिन, टेबल क्लाथ, डस्ट बीन फिनाइल सहित करीब 20 लाख के सामान की खरीदी की।

यहहै खरीदी की प्रक्रिया

स्वास्थ्यकेंद्रों द्वारा पहले मांग पत्र आता है। उसे क्रय समिति में रखा जाता है। क्रय समिति के अध्यक्ष कलेक्टर होते हैं। खरीदी के लिए बजट और सामग्री खरीदी की आवश्यकता देखी जाती है। इसके लिए क्रय समिति की बैठक होती है। जिसमें निर्णय होता है कि किससे खरीदी करना है। सामग्री का मूल्य क्वालिटी को देखा जाता है। उसके बाद ही खरीदी की जाती है तथा बिल को चढ़ाया जाता है।