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181: कॉल कीजिए मगर कार्रवाई की गारंटी नहीं

6 वर्ष पहले
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छतरपुर | मां की मौत के बाद भी नहीं आया रिस्पांस

जिलेमें रामगढ़ के सतीश मिश्रा सीएम हेल्पलाइन से किसी तरह की मदद मिलने की बात को सिरे से नकार देते हैं। उनका कहना है कि यह सब बोगस और झूठ है। वे अपना खुद का अनुभव भी बताते हैं। सतीश ने बताया कि उनकी मां विमलादेवी की तबीयत 28 नवंबर 2014 को बिगड़ गई थी। सतीश पिता कैलाशचंद्र मां को जिला अस्पताल ले गए। मां की हालत बेहद गंभीर होती जा रही थी। डॉक्टरों ने उन्हें तत्काल ग्वालियर मेडिकल कॉलेज रैफर कर दिया। ग्वालियर ले जाने के लिए एम्बुलेंस की जरूरत थी, लेकिन जिला अस्पताल की एम्बुलेंस खराब थी। सतीश ने तत्काल 108 पर कॉल किया। 108 के कॉल सेंटर से बताया केवल झांसी तक ही मरीजों को छोड़ने की व्यवस्था है। उन्होंने इसकी शिकायत सीएम हेल्पलाइन पर की। दूसरी ओर से तत्काल मदद का आश्वासन मिला लेकिन देर रात तक एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं हुई। समय पर उपचार नहीं मिलने से मां विमला की मौत हो गई लेकिन हेल्पलाइन से अब तक रिस्पांस नहीं आया।

शिकायत के समाधान की यह रही पूरी प्रक्रिया

यह दावे किए गए थे

> भ्रष्टाचार संबंधी शिकायतों पर शिकायतकर्ता को 48 घंटे के भीतर जवाब मिलेगा।

> सामान्य शिकायतों का निराकरण 7 दिन के भीतर करने का प्रयास किया जाएगा।

> शिकायत अथवा समस्या का समाधान होने पर शिकायतकर्ता को एसएमएस से सूचना दी जाएगी।

> परीक्षण अवधि (जनवरी 2014 से जुलाई 2014) में 1 लाख से ज्यादा शिकायतें दर्ज हुईं। इनमें से 71 हजार से ज्यादा निराकृत हुईं।

> रोजाना 5 से 10 हजार शिकायतें सुनी जाएंगी।

कई जानकारियां

कॉलकरने पर शासन की विभिन्न योजनाओं की जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

अन्य मदद

शिकायतोंके अलावा 108, 100, 102 जननी एक्सप्रेस उपलब्ध हो सकती है।

यह है फायदा

एककॉल करने पर विभिन्न विभागों से जुड़ी समस्याओं का निराकरण हो सकता है।

यह है उद्देश्य

प्रदेशवासियोंको विभिन्न समस्याओं के निराकरण के लिए भटकना पड़े।

4 इसके बाद कमिश्नर स्तर पर शिकायत का निराकरण कराया जाता है।

3 दोनों स्तर पर कार्रवाई हो तो कलेक्टर समकक्ष अधिकारी को शिकायत, समस्या भेज दी जाती है।

2 प्रथम स्तर पर हल निकलने पर वरिष्ठ अधिकारी के पास भेजते हैं।

1 शिकायतें दर्ज करने के बाद कार्रवाई के लिए संबंधित विभाग प्रमुख के पास भेजी जाती हैं।

यह दावे किए गए थे

> भ्रष्टाचार संबंधी शिकायतों पर शिकायतकर्ता को 48 घंटे के भीतर जवाब मिलेगा।

> सामान्य शिकायतों का निराकरण 7 दिन के भीतर करने का प्रयास किया जाएगा।

> शिकायत अथवा समस्या का समाधान होने पर शिकायतकर्ता को एसएमएस से सूचना दी जाएगी।

> परीक्षण अवधि (जनवरी 2014 से जुलाई 2014) में 1 लाख से ज्यादा शिकायतें दर्ज हुईं। इनमें से 71 हजार से ज्यादा निराकृत हुईं।

> रोजाना 5 से 10 हजार शिकायतें सुनी जाएंगी।

खास बातें

1अगस्त

2014 को शुरू हुई थी हेल्पलाइन। (प्रायोगिक तौर पर यह जनवरी 2014 में ही शुरू हो गई थी।

37, 35,369

कॉल अब तक किए गए हैं।

सुबह 7.00

से रात 11.00 बजे तक नि:शुल्क कॉल कर शिकायत या समस्या दर्ज कराई जा सकती है।

5000

अधिकारी-कर्मचारी लोगों की समस्याओं के लिए इससे जोड़े हैं।

भास्कर न्यूज | एमपी-टू

सीएमहेल्पलाइन पिछले साल 1 अगस्त को शुरू हुई थी। शुरुआत में नाली की साफ-सफाई, कचरा उठाने जैसी शिकायतें करने पर तत्काल उनपर काम हुआ। प्रचार-प्रसार ठीक तरह से किए जाने के बावजूद योजना की जानकारी लोगों तक पहुंचने लगी। हेल्पलाइन तक पहुंचने वाली शिकायतों की संख्या बढ़ने के साथ ही अब खुद हेल्पलाइन की शिकायतें बढ़ रही हैं। गंभीर किस्म की ज्यादातर शिकायतों पर कोई एक्शन नहीं लिया जा रहा। बल्कि हेल्पलाइन की ही गंभीर शिकायतें सामने आई हैं।

एक समस्या 7-8 बार शिकायत करने के बाद भी हल नहीं हो रही। आपत्ति दर्ज कराने पर हेल्पलाइन के एक्जिक्यूटिव दोबारा कॉल नहीं करने की हिदायत दे रहे हैं। ऐसे भी मामले सामने आए हैं जिनमें समस्या हल करवाने के बजाय वरिष्ठ अधिकारियों को झूठी जानकारी देकर प्रकरण ही बंद कर दिया गया है। अधिकारी जवाब देने की जल्दबाजी में सिर्फ गलत जवाब भेज रहे हैं, बल्कि गलत जानकारी भी फीड की जा रही है। उज्जैन और होशंगाबाद जिले के सोहागपुर में ऐसा हो चुका है। उज्जैन की एक शिकायत पर मुख्यमंत्री सचिवालय को झूठी जानकारी दे दी गई कि कार्रवाई कर प्रकरण समाप्त किया जा चुका है, जबकि संबंधित विभाग ने ऐसी कोई कार्रवाई नहीं की। सोहागपुर की एक शिकायत के जवाब में भी बाबू ने पोर्टल पर समस्या हल होने की झूठी जानकारी फीड कर दी। शिकायतकर्ता ने दोबारा हेल्पलाइन पर कॉल किया। जांच में बाबू की फीड जानकारी झूठी पाई गई। उसे निलंबित किया जा चुका है।