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बीएचयू के प्रो. पंडा बने संस्कृत विवि कुलपति

6 वर्ष पहले
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बनारसहिंदू विवि (बीएचयू) के प्रोफेसर रमेशचंद्र पंडा महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विवि के नए कुलपति होंगे। राज्यपाल रामनरेश यादव की ओर से सोमवार को उनकी नियुक्ति के आदेश जारी किए गए।

संस्कृत विवि में 28 अगस्त 2011 को धारा-52 लगाकर प्रो. मिथिलाप्रसाद त्रिपाठी को कुलपति नियुक्त किया गया था। प्रो. त्रिपाठी का कार्यकाल अगस्त 2014 में ही समाप्त हो चुका है। कुलसचिव डॉ. मनोज कुमार तिवारी ने बताया सोमवार दोपहर प्रो. पंडा की नियुक्ति के संबंध में राजभवन से आदेश प्राप्त हो चुके हैं। प्रो. पंडा संस्कृत विवि के तीसरे कुलपति होंगे।

जल्दीसंभालूंगा कार्यभार: चर्चामें प्रो. पंडा ने बताया सोमवार शाम 4 बजे ही उन्हें कुलपति नियुक्त किए जाने के आदेश प्राप्त हुए हैं। जल्द ही उज्जैन आकर कुलपति का कार्यभार संभालूंगा। प्रो. पंडा ने कहा संस्कृत भाषा साहित्य में शोध की जरूरत है। कई अप्रकाशित हस्तलेखों का भी प्रकाशन करवाया जाएगा।

व्याकरणके लिए प्रसिद्ध

संस्कृतविवि के साधारण परिषद सदस्य डॉ. राजेश्वर शास्त्री मुसलगांवकर भी प्रो. पंडा के शिष्य हैं। डॉ. मुसलगांवकर के अनुसार प्रो. पंडा देश के जाने-माने व्याकरणविद हैं आैर संस्कृत जगत में उनका नाम प्रतिष्ठा के साथ लिया जाता है। प्रो. पंडा के कुलपति बनने से संस्कृत विवि की स्थापना के उद्देश्यों की पूर्ति होगी।

कुलपति पंडा का परिचय

मूलरूपसे उड़ीसा के रहने वाले 60 वर्षीय प्रो. पंडा ने पुणे विवि से एमए आैर पीएचडी की है। देश के ख्यात व्याकरणविद् शिवराम दत्तात्रेय जोशी के शिष्य हैं। वर्ष 1988 में काशी हिंदू विवि (अब बनारस हिंदू विवि) में रीडर के पद पर उनकी नियुक्ति हुई थी। 1998 में प्रोफेसर बने। 2009 से 2012 तक संस्कृत विधा एवं धर्म विज्ञान संकाय के डीन रहे। वर्तमान में व्याकरण विभाग के अध्यक्ष हैं।