शहर व जिले में नई सड़कों पर बढ़ेगी 10 प्रतिशत गाइड लाइन
यह है गाइड लाइन बढ़ने की वजह
जिले में करीब 22 वार्ड ऐसे हैं, जहां की प्राॅपर्टी की गाइड लाइन से ज्यादा में रजिस्ट्री हुई यानि जो गाइड लाइन तय थी, उसके अनुसार पक्षकार ने रजिस्ट्री न करवाकर ज्यादा में रजिस्ट्री करवाई। इसी वजह से गाइड लाइन बढ़ाई जा रही है, क्योंकि नियम के तहत यदि तीन या उससे अधिक दस्तावेजों की रजिस्ट्री कलेक्टर गाइड लाइन से ज्यादा में होती है तो वहां हुई रजिस्ट्री के शुल्क से गाइड लाइन तय की जा सकती है।
क्या करें लोग : नई कलेक्टर गाइड लाइन लागू होने में अभी 58 दिन शेष हैं। पक्षकारों को चाहिए कि वे पुरानी गाइड लाइन से उक्त अवधि में रजिस्ट्री करवा लें। इस तरह से वे नई गाइड लाइन से बच सकेंगे। पक्षकार मार्च का भी इंतजार न करें, क्योंकि स्लाॅट लिमिटेड है।
गाइड लाइन बढ़ाई तो होगा विरोध: किसान कांग्रेस के प्रवक्ता सुरेंद्र मरमट का कहना है कि किसान सूखे से प्रभावित हैं, ऐसे में गाइड लाइन नहीं बढ़ाई जाना चाहिए। गाइड लाइन बढ़ाई तो इसका पूरे प्रदेश में विरोध किया जाएगा। पक्षकारों पर भी इसका सीधा असर पड़ेगा। जनहित में गाइड लाइन नहीं बढ़ाना चाहिए।
भास्कर संवाददाता | उज्जैन
उप जिला मूल्यांकन समिति की बैठक गुरुवार को एसडीएम क्षितिज शर्मा के कार्यालय में हुई, जिसमें यह प्रस्ताव आए कि शहर व जिले में जहां नई सड़कें बनी हैं, वहां की जमीन की कलेक्टर गाइड लाइन 10 प्रतिशत बढ़ाई जाए। इसका युक्तियुक्तकरण भी होगा यानि जहां कम गाइड लाइन है, वहां पड़ोस की जमीन के समान गाइड लाइन की जाएगी। ऐसे में यदि गाइड लाइन बढ़ी तो प्राॅपर्टी के दामों पर तो असर पड़ेगा ही रजिस्ट्री करवाने के लिए भी पक्षकारों को ज्यादा शुल्क चुकाना पड़ेगा।
1 अप्रैल 2016 से नई गाइड लाइन लागू होगी। इसको लेकर उप जिला मूल्यांकन समिति की बैठक गुरुवार को हुई। एसडीएम कार्यालय में डिप्टी रजिस्ट्रार शैलेंद्र सिंह दंडोतिया ने बैठक ली, जिसमें शहर के अलग-अलग क्षेत्रों के आवासीय भूखंड व व्यवसायिक भूखंडों तथा कृषि भूमि पर गाइड लाइन तय करने के प्रस्ताव आए हैं। वहीं शहर व जिले में बनी नई सड़कों पर जमीन की गाइड लाइन 10 प्रतिशत तक बढ़ेगी। बैठक में यूडीए, टीएनसीपी, पीडब्ल्यूडी, पंजीयन विभाग के प्रतिनिधि शामिल हुए। 1 अप्रैल से लागू होने वाली नई गाइड लाइन के तहत संपत्ति की रजिस्ट्री करवाएंगे तो आपको ज्यादा शुल्क चुकाना होगा। ऐसे में पक्षकारों पर अतिरिक्त आर्थिक भार बढ़ेगा। वहीं संपत्ति के दाम बढ़ेंगे।
उपजिला मूल्यांकन समिति के बैठक में प्रस्ताव पर चर्चा हुई है। शैलेंद्र सिंह दंडोतिया, डिप्टी रजिस्ट्रार पंजीयन विभाग