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महाकाल के आंगन में गूंजे मालवी निमाड़ी लोक गीत

7 वर्ष पहले
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महाकालमंदिर में चल रहे उमा-सांझी महोत्सव के अंतर्गत रविवार शाम महाकाल का आंगन मालवी आैर निमाड़ी लोक गीतों से गूंज उठा।

मंदिर प्रांगण में सांस्कृतिक कार्यक्रम के अंतर्गत हेमलता उपाध्याय (खंडवा) ने साथी कलाकारों के साथ पारंपरिक मालवी आैर निमाड़ी लोक गीतों का गायन किया। उन्होंने शुरुआत में गणपति वंदना गुरु वंदना सतगुरु रंगाई म्हारी या चुनड़ी गीत गाया। इसके बाद नर्मदा शिप्रा नदी पर रचित भजन सच्चा मन सी भजन करूंगा, संजा का लोकगीत संजा तू थारा घर जा, चल वो संजा अपुण खेलण चला, छोटी सी गाड़ी लुड़कती जाए, बाई संजा तू एक दूर बसी आैर घर पर बठी चिड़ियां, संजा का सासर सी हत्ती बी आयो आदि सुनाया। इसके अलावा उन्होंने शिव-पार्वती विवाह गीत म्हारी उमा ने जोगी वर पायो भी सुनाया। उनके साथ संगत पद्मा अतरे सुनीता महोदय (गायन), पं.सोमनाथ (तबला), जितेंद्र गजभिये (ढोलक), आशीष शर्मा (कीबोर्ड), अनिल (ऑक्टोपेड) ने दी। इसके पहले शाम 5.30 बजे से समर्थ बालकृष्ण नाथजी ढोली बुवाजी महाराज (ग्वालियर) ने नारदीय कीर्तन प्रस्तुत किया। इनके साथ संगत गोपाल वासुदेवनाथ ढोली बुवा (मृदंग) आैर निशिकांत वासुदेवनाथ ढोली बुवा (हारमोनियम) ने की। सुबह संजा की रांगोली में शीश महल बनाया गया। महोत्सव में सोमवार को मालवा लोक कला केंद्र उज्जैन की ओर से लोक नृत्य आैर रंगारंग कार्यक्रम कृष्णा वर्मा के निर्देशन में प्रस्तुत किया जाएगा।

मालवी निमाड़ी लोकगीतों की प्रस्तुित देतीं हेमलता उपाध्याय अन्य।