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संजा लोकोत्सव का रंगारंग समापन

7 वर्ष पहले
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(संजा के लोकगीतों पर आधारित नृत्य नाटिका की प्रस्तुित देते कलाकार।)
उज्जैन। प्रतिकल्पा सांस्कृतिक संस्था एवं दक्षिण मध्य सांस्कृतिक केंद्र नागपुर द्वारा आयोजित अखिल भारतीय संजा लोकोत्सव एवं लोककला यात्रा का रविवार को शहीद राजाभाऊ महाकाल स्मृति सभागृह लोकमान्य तिलक स्कूल में समापन हुआ। इस दौरान विभिन्न राज्यों के जनजातीय लोक कलाकारों ने नृत्य प्रस्तुति दी। संजा के लोकगीतों पर आधारित नृत्य नाटिका भी हुई। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि सांसद डॉ. चिंतामणि मालवीय थे। अध्यक्षता विवि के पूर्व कुलपति डॉ. रामराजेश मिश्र एवं विशिष्ट अतिथि डायरेक्टर इन्फ्राबुल्स डॉ. संतोषसिंह उपस्थित थे।
कार्यक्रम में साहित्य एवं पुरातत्व के क्षेत्र में विशेष योगदान देने के लिए डॉ. श्यामसुंदर निगम को प्रति कल्पा शिखर सम्मान से नवाजा गया। इसी के साथ लोकगीत, लोकनृत्य, संजा एवं मांडना प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कार एवं प्रमाण पत्र प्रदान किए।

संगोष्ठी में विद्वानों ने कहा, संजा पर्व हमारी सांस्कृतिक विरासत : संजा लोकोत्सव के अंतिम दिन कालिदास अकादमी में हिंदी अौर मालवी लोककला साहित्य एवं संस्कृति के सरोकार विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गई। प्रख्यात संस्कृतिविद् डॉ.श्री कृष्ण जुगनू ने कहा संजा पर्व के आधार लोक से लेकर श्लोक तक व्याप्त है यह विश्वकर्मा की बेटी है, जिसका विवाह सूर्य से हुआ था। अध्यक्ष के रूप में मौजूद वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. शिव चौरसिया ने कहा संजा पर्व हमारी सांस्कृतिक विरासत को आत्मसात करने का पर्व है।
कुलानुशासक प्रो.शैलेंद्र शर्मा ने कहा संजा पर्व के आधार में भारतीय संस्कृति और प्रकृति के उपादान है। यह पर्व जीवन और कला की पाठशाला है। विशिष्ट अतिथि नर्मदा एवं ग्रामीण बैंक के क्षेत्रीय प्रबंधक प्रवीण डोंगरे ने कहा हिंदी का विकास लोक बोलियां के बिना संभव नहीं है।
डॉ. पूरण सहगल ने कहा कला धरती से जुड़ जाती है तो वह समाप्त नहीं होती है। इस अवसर पर शोधकर्ताओं ने अपने शोधपत्रों का वाचन किया। स्वागत भाषण डॉ. पल्लवी किशन ने दिया एवं संचालन रूपाली सरये ने किया। आभार गुलाब सिंह यादव ने माना।