बीमारी| पहले ही दिन सर्दी-जुकाम से पीड़ित सैकड़ों मरीज जिला अस्पताल पहुंचे, लोगों में स्वाइन फ्लू का भय
उज्जैन। स्वाइन फ्लू के लिए जिला अस्पताल सहित समस्त सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और डिस्पेंसरी पर स्क्रीनिंग काउंटर खोले गए हैं। जिला अस्पताल में दोपहर 2 बजे से लेकर शाम 6 बजे तक चिकित्सकों ने सर्दी-जुकाम के मरीजों की जांच की। जिले में स्वाइन फ्लू को लेकर लोगों भय हैं। हल्की सर्दी-जुकाम, हाथ-पैर दर्द होने पर भी लोग जिला अस्पताल पहुंचकर जांच करवा रहे हैं। स्वाइन फ्लू के जिला नोडल अधिकारी एच पी सोनानिया ने बताया शनिवार को दोपहर 2 बजे से लेकर शाम 6 बजे तक सैकड़ों सर्दी-खांसी के मरीज जांच करवाने आए। उन्होंने घर जाते समय भी अस्पताल के गेट पर मरीजों की जांच की।
एक पॉजीटिव एक की मौत
शाजापुरजिले के झोंकर ग्राम के एक मरीज में स्वाइन फ्लू की पॉजीटिव पाया गया है। हालांकि मरीज स्वस्थ है और इंदौर के एक अस्पताल में उपचाररत है। वहीं उज्जैन जिले के बड़नगर की 50 वर्षीय महिला की इंदौर में इलाज के दौरान मौत हो गई। उसका स्वाइन फ्लू की आशंका में उपचार किया जा रहा था।
स्कूलों के लिए निर्देश नहीं : स्वाइन फ्लू की दस्तक से जिले में हड़कंप मचा हुआ है लेकिन स्कूलों को लेकर अब तक कोई निर्देश जारी नहीं किए हैं। जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग आैर जिला शिक्षा विभाग की ओर से शनिवार शाम तक इस संबंध में कोई पहल नहीं की गई। जबकि स्वाइन फ्लू की सबसे ज्यादा संभावना बच्चों में ही होती है, क्योंकि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। शिक्षा विभाग की उपसंचालक रमा नाहटे का कहना है कि स्वास्थ विभाग की ओर से जो भी निर्देश जारी होंगे उनका पालन करवाया जाएगा।
वार्ड में न डॉक्टर, न मरीज: माधवनगर अस्पताल के स्वाइन फ्लू वार्ड में एक भी मरीज नहीं है। लोग निजी अस्पतालों में इलाज करवा रहे हैं। स्वाइन फ्लू का इलाज करने वाले डॉक्टर एच पी सोनानिया ने शनिवार को जिला अस्पताल के स्क्रीनिंग काउंटर पर ड्यूटी की। माधवनगर अस्पताल से एक मरीज के सेंपल जांच के लिए भेजे गए थे। उसे फिलहाल जनरल वार्ड में रखा है।
नहीं आई रिपोर्ट: पिछले दिनों कुल 12 मरीजों के स्वाब के नमूने आईसीएमआर लेब जबलपुर भेजे गए हैं। इनमें से 4 फ्लू के वायरस पाए गए। इनमें से तीन मरीजों की मौत हो चुकी हैं। बाकी सेंपल की रिपोर्ट अब तक नहीं आई हैं।
कल से काड़े के पाउच वितरण : चिमनगंजथाने के समीप स्थित शासकीय धनवंतरि आयुर्वेद चिकित्सालय में स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए 9 फरवरी से काड़ा के पाउच वितरित किए जाएंगे। विश्व आयुर्वेद परिषद के जिलाध्यक्ष डॉ. ओपी व्यास ने बताया सोमवार से सुबह 9 से 12 बजे के बीच काड़ा के पाउच बांटेंगे।
पाउच के लिए लोगों को अस्पताल में 2 रुपए में बनने वाली पर्ची लेनी होगी। इसके अलावा प्रेस क्लब आैर आयुष विभाग के संयुक्त प्रयास से 9 से 11 फरवरी तक तरणताल स्थित प्रेस भवन में भी नि:शुल्क काड़ा पिलाया जाएगा। प्रेस क्लब सचिव विशाल हाड़ा के अनुसार दोपहर 12 से 3 बजे तक इसका वितरण होगा।
एलोपैथ, होम्योपैथ और आयुर्वेद तीनों में स्वाइन फ्लू का इलाज संभव:
होम्योपैथ : डॉ. धर्मेंद्र साहू के अनुसार स्वाइन फ्लू के परिप्रेक्ष्य में सर्दी-खांसी हल्का बुखार होने पर शारीरिक लक्षण के आधार पर प्रारंभिक अवस्था में अगर मरीज आता है तो होम्योपैथ में मरीज के 90 प्रतिशत से अधिक रिकवर होने की संभावना है। होम्योपैथ में जेलसिनियम, आर्सेनिकम, रस्टॉक आदि दवाओं के जरिए तीन दिन के ट्रीटमेंट में इलाज संभव। शारीरिक लक्षण के आधार पर ट्रीटमेंट की अवधि बढ़ सकती है।
आयुर्वेद: डॉ. रामतीर्थ शर्मा के अनुसार सर्दी-खांसी, बुखार, सिर पेट दर्द, एसीडिटी, चक्कर आना पैरों में दर्द होने पर नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद जयपुर की रिसर्च में तैयार काड़ा पिलाया जाता है। गिलोय, नीम गिलोय, कटेरी, हल्दी, अतिविषा, सौंठ, दाल-चीनी, छोटी इलाइची, काली मिर्च आदि मिलाकर यह काड़ा बनाया जाता है। इसके अलावा निरोसिल, लक्ष्मी विलास रस, ब्रेसौल की गोलियां आैर सरसों या तिल के गुनगुने तेल में सेंधा नमक डालकर सुबह शाम सीने पर मालिश करने के 3 से 7 दिन के ट्रीटमेंट में उपचार संभव।
एलोपैथ: डॉ. सीएम पुराणिक के अनुसार फ्लू की अलग-अलग कैटेगरी के आधार पर ट्रीटमेंट है। टैमी फ्लू के अलावा बीमारी से पहले वैक्सीन प्रोटेक्शन मेडिसिन उपलब्ध हैं। बीमारी के बाद भी एंटी वायरल दवाएं हैं।