उज्जैन। सिंहस्थ के कामों में तेजी और तालमेल की कमी को मौके पर दूर करने के लिए कमिश्नर-कलेक्टर की हर सोमवार शुरू की गई स्टैंडअप मीटिंग में हर बार 40 गाड़ियों का काफिला चला और मौके पर अफसरों की भाव भंगिमाएं सुर्खियां बनी, लेकिन 1 सितंबर 14 से शुरू स्टैंडअप मीट का सिलसिला 21 मीटिंग्स के बाद भी सिंहस्थ के काम की चाल तेज नहीं कर सका है। अलबत्ता करीब सवा लाख का ईंधन जरूर जल गया है। जो लोगों में चर्चा का विषय है।
इसे ऐसे समझे :- हर सोमवार स्टैंडअप मीटिंग में संभागायुक्त, कलेक्टर, नगर निगम आयुक्त अविनाश लवानिया, एडीएम अवधेश शर्मा, जिपं सीईओ डॉ. एमपी पटेल, उज्जैन-घट्टिया एसडीएम सहित करीब 40 अधिकारियों की गाड़ियां रहती है। अब तक 21 बार स्टैंडअप मीटिंग हो चुकी है। एक स्टैंडअप मीटिंग पर एक वाहन में 2 लीटर ईंधन भी खर्च होता हैं तो 40 गाड़ियों में 80 लीटर ईंधन खर्च होगा। एक मीटिंग में 40 गाड़ियां तो 21 मीटिंग में गाड़ियों की संख्या 840 होगी और 2 लीटर के मान से इन सभी गाड़ियों में 1680 लीटर ईंधन खर्च हुआ। एक लीटर ईंधन की अनुमानित कीमत 70 रुपए भी मानी जाए तो सभी गाड़ियों में 21 स्टैंडअप मीटिंग के दौरान 1 लाख 17 हजार 600 रुपए का ईंधन खर्च हुआ। इसके अतिरिक्त रास्ते के खर्च अलग से शामिल हैं।
(नोट-ये आदेश संभागायुक्त कलेक्टर ने स्टैंडअप मीटिंग में मौके पर संबंधित विभाग के अधिकारियों को दिए थे)
'' स्टैंडअप मीिटंग का मतलब मौके पर जाकर सभी विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर रूके कार्य की शुरुआत से है। जिसके रिजल्ट का अंदाजा घाट, आगररोड सहित अन्य निर्माण में कार्यों की तेजी से लगाया जा सकता है।''- कवींद्र कियावत, कलेक्टर
1 सितंबर- मंदिरोंकी व्यवस्था जानने के लिए दिल्ली के लोटस टेंपल, अक्षरधाम, इस्कान का भ्रमण करें। मंदिर का मास्टर प्लान अच्छे आर्कटिक से बनाया जाए, महाकाल मंदिर के शिखर पर 100 मीटर की ध्वजा लगाई जाए। वर्तमानस्थिति- किसीभी विभाग का दल भ्रमण के लिए जाना तो दूर, मास्टर प्लान शिखर पर ध्वजा के संबंध में चर्चा तक नहीं हुई।
8 सितंबर-136 मंदिरोंका सिटी टूर सर्किट बनाया जाए ताकी यात्री सुविधा के अनुसार पैकेज चुन सके। जिसमें भ्रमण कराने वाले वाहनों में हिंदी, अंग्रेजी, गुजराती, बंगला भाषा में कमेंट्री की व्यवस्था रहेगी। वर्तमानस्थिति- निर्देशके दिन से अब तक वहीं स्थिति।
15सितंबर- त्रिवेणीसे शिप्रा के दोनों ओर सौंदर्यीकरण, लाइट घाटों का विकास होगा। वर्तमानस्थिति- नदीके दोनों ओर सर्वे किया गया। कुछ स्थानों पर घाटों का विकास किया जा रहा है। वहीं हाल ही में लाइट के टेंडर जारी किए गए है लेकिन सौंदर्यीकरण के नाम पर कुछ नहीं है।
23सितंबर- घाटों पर पीने का पानी, बाहर निकलने के ज्यादा रास्ते होंगे। वर्तमानस्थिति- मुख्यघाट रामघाट पर ही पेयजल व्यवस्था में कोई सुधार नहीं, बाहर निकलने के कितने रास्ते होंगे अब तक नहीं स्पष्ट नहीं।
29सितंबर- बेगमबाग फोरलेन की बाधाएं दूर होंगी। वर्तमानस्थिति- अतिक्रमणके नाम पर एक पत्थर भी नहीं हटाया गया। स्थिति जस की तस।
20अक्टूबर- खाकचौक चौराहा सुंदर बनाओ क्योंकि सिंहस्थ के मंगलनाथ जोन का सबसे महत्वपूर्ण चौराहा खाकचौक है। वर्तमानस्थिति- कोईसुधार नहीं बल्कि कलेक्टर के निर्देश पर एसडीएम कार्यालय घट्टिया भेज दिया गया। खाकचौक चौराहा सिंहस्थ का मंगलनाथ जोन घट्टिया तहसील में आता है।
27अक्टूबर- महाकालओवरब्रिज चौड़ीकरण के लिए अतिक्रमण तत्काल हटाए जाए।
वर्तमान स्थिति- अतिक्रमण की संख्या पहले से अधिक बढ़ गई।
3 नवंबर- पूरे शहर में 500 श्रमिक लगाकर सफाई की जाए, अतिक्रमण हटाए जाए, शहर को व्यवस्थित किया जाए जिसमें राजस्व, पुलिस, यूडीए, नगर निगम के अधिकारी शामिल रहेंगे। वर्तमानस्थिति- सफाईतो दूर कईं गलियां और चौराहे गंदगी से पटे हुए पड़े है। शहर जैसा था वैसा ही दिखाई देता है। कोई टीम नहीं बनी।
10 नवंबर- नागझिरीक्षेत्र में सड़क से कब्जे हटाए जाए, माधव क्लब माधवनगर स्टेशन के सामने अतिक्रमण तत्काल हटाया जाए। वर्तमान-शुरुआतीएक-दो दिन कार्रवाई की गई। उसके बाद चर्चा और कार्रवाई।
17नवंबर- सभी मार्गों पर एक जैसे साइन बोर्ड और गेंट्री गर्डर लगाए जाए। वर्तमानस्थिति- किसीभी मार्ग पर कुछ नहीं।
24नवंबर- नानाखेड़ा स्टेडियम योजना स्पोटर्स अथॉरटी ऑफ इंडिया को भेजी जाए। सिंहस्थ में यहां यात्रियों को ठहराने की व्यवस्था की जाएगी। वर्तमानस्थिति- हालतजस के तस, ताजा हालात के लिहाज से सिंहस्थ के यात्री मैदान में जरूर ठहर सकते हैं।
बस में एक साथ भ्रमण से बचेगा ईंधन : स्टैंडअप मीटिंग सहित अन्य सभी दौरे या भ्रमण बस से किए जाए तो इससे ईंधन के तौर पर शासन को साल भर में लाखों रुपए की बचत होगी। इसके लिए संभागायुक्त, कलेक्टर सहित अन्य सभी विभागों के अधिकारी-कर्मचारी एक बस में साथ निकलना होगा। उल्लेखनीय है राज्य शासन ने हाल ही में एक सर्कुलर जारी किया था, जिसमें स्पष्ट किया गया था कि चपरासी से लेकर अधिकारी तक सभी को शासकीय सेवक कहा जाए। स्टैंडअप मीटिंग या अन्य दौरे पर सारे अधिकारी कोठी पहुंचकर और से एक साथ बस से निकले तो शासन के ईंधन खर्च को बचाया जा सकता है।