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प्रभारी मंत्री की मंजूरी के बाद भी पचड़े में बायपास की बिजली

5 वर्ष पहले
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हरिफाटक मार्ग से उन्हेल मार्ग तक बायपास
प्रभारी मंत्री भूपेंद्र सिंह की मंजूरी के बाद भी सिंहस्थ बायपास की बिजली पचड़े में पड़ी हुई है। पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के सिंहस्थ डिवीजन के अधिकारी कह रहे हैं कि अभी हमारे पास ऐसा कोई आदेश नहीं आया है। ऐसे में बायपास से अंधेरे के बादल नहीं छंट रहे हैं।

सिंहस्थ 2016 के मददेनजर 110 करोड़ की लागत के हरिफाटक मार्ग से उन्हेंल मार्ग तक सिंहस्थ बायपास का निर्माण किया गया है। यह शहर को बायपास करते हुए बाहर से जाने का बेहतर विकल्प है। यहां पहले तो सेंटर लाइटिंग व स्ट्रीट लाइट का प्रावधान ही नहीं किया गया। बाद में पीडब्ल्यूडी की ईएंडएम शाखा ने प्रस्ताव बनाया तो उसे साधिकार समिति ने तो मंजूरी दे दी लेकिन चीफ सेक्रेटरी एंथेानी डीसा ने इस प्रस्ताव को नामंजूर करते हुए आदेश जारी किए कि पक्षेविविकंलि विद्युत पोल लगाए तथा नगर निगम एलईडी। इसके बाद पिछले दिनों प्रभारी मंत्री भूपेंद्र सिंह के उज्जैन आगमन पर नगर निगम सभापति सोनू गेहलोत व अन्य जनप्रतिनिधियों से बायपास पर लाइन का मुद्दा उठाया तो प्रभारी मंत्री ने लाइट लगाने की मंजूरी दे दी। हालांकि अब भी यह पचड़े में पड़ी है। बिजली कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि हमारे पास अब तक आदेश नहीं आया है। जिसके चलते मामला उलझा हुआ है ओर बायपास अंधेरे में है। जबकि उन्हें चल रहे कार्यों के तहत ही विद्युत पोल व केबल डालना है।

इनका कहना
हमारे पास अभी सिंहस्थ बायपास पर लाइट लगाने के आदेश नहीं आए हैं। एके त्यागी, एसई, सिंहस्थ पक्षेविविकंलि

प्रभारी मंत्री के सामने यह मुददा उठा था। उन्होंने इसकी मंजूरी दे दी है।बिजली कंपनी को सिंहस्थ कार्यों में ही विद्युत पोल व केबल लगाना है। सोनू गेहलोत, नगर निगम सभापति

श्रद्धालु अंधेरे में कैसे

करेंगे आवागमन
अंधेरा होने से सिंहस्थ में श्रद्धालुओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। यहां से] गुजरना उनके लिए मुश्किल होगा। इंदौर रोड से उन्हें बायपास कर दिया जाएगा। ऐसे में श्रद्धालुओं को मजबूरी में इस अंधेरे रास्ते से होकर निकलना पड़ेगा।

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