विद्यार्थी पढ़ेंगे तंत्र आैर ज्योतिष का नया विषय
विक्रम विवि की संस्कृत, वेद एवं ज्योतिर्विज्ञान अध्ययनशाला से ज्योतिर्विज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएशन करने वाले विद्यार्थी अब तंत्र आैर ज्योतिष का नया विषय भी पढ़ सकेंगे। एमए ज्योतिर्विज्ञान के दूसरे सेमेस्टर में इस नए विषय को बुधवार को बोर्ड ऑफ स्टडीज ने मंजूरी दे दी है। इसी सत्र से यह नया विषय विद्यार्थियों को पढ़ाया जाएगा।
विभागाध्यक्ष डॉ. राजेश्वर शास्त्री मुसलगांवकर ने एमए ज्योतिर्विज्ञान दूसरे सेमेस्टर में तंत्र आैर ज्योतिष का नया पेपर शुरू करने का प्रस्ताव दिया था। बुधवार दोपहर 12 बजे विवि के मुख्य प्रशासनिक भवन में संस्कृत अध्ययन मंडल की बैठक हुई। चेयरमैन डॉ. बालकृष्ण शर्मा के अलावा सदस्य डॉ. विष्णु शर्मा (जावरा), डॉ. शीतांशु रथ, प्रो. रतनसिंह अनारे (देवास), प्रो. रमेशचंद्र शर्मा एवं डॉ. मुसलगांवकर उपस्थित हुए। डॉ. मुसलगांवकर ने बताया तंत्र आैर ज्योतिष के नए विषय के प्रस्ताव को बोर्ड ऑफ स्टडीज ने मंजूरी दे दी है। एक सप्ताह के भीतर ही शुरू होने वाली दूसरे सेमेस्टर की कक्षा में इसकी पढ़ाई भी शुरू करवा दी जाएगी। इसके अलावा संस्कृत के द्वितीय सेमेस्टर के प्रश्न पत्रों को भी यूजीसी नेट के निर्धारित पाठ्यक्रम के अनुरूप बनाने का निर्णय लिया गया है। डॉ. मुसलगांवकर के अनुसार तंत्र आैर ज्योतिष पर आधारित विषय शुरू करने वाला विक्रम विवि संभवत: देश का पहला विश्वविद्यालय बनेगा।
नए विषय में यह पढ़ेंगे विद्यार्थी
एमए ज्योतिर्विज्ञान दूसरे सेमेस्टर में अब तक संस्कृत, ज्योतिर्विज्ञान, वास्तु आैर कंप्यूटर विषय शामिल थे। कंप्यूटर विषय को हटाकर तंत्र एवं ज्योतिष का नया विषय शामिल किया गया है। इसका 50 नंबर का पेपर होगा। तंत्र एवं ज्योतिष के नए विषय में विद्यार्थियों को तंत्र, मंत्र आैर वेद की वैज्ञानिकता पर आधारित पाठ्यक्रम पढ़ाया जाएगा। इसके अलावा तंत्र के विषय में व्याप्त भ्रांतियां, डर आैर इन्हें दूर करने के लिए तंत्र की शास्त्रीय व्याख्या पर आधारित पढ़ाई भी होगी। तंत्र, मंत्र व यंत्र के आंतरिक संबंध को भी तथ्यों से अवगत कराते हुए जानकारी दी जाएगी। एमए ज्योतिर्विज्ञान में अभी 23 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं।
नई शुरुआत