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शिप्रा शुद्धिकरण के लिए बनेगा मास्टर प्लान हर घाट के रखरखाव के लिए प्रबंधन समिति

5 वर्ष पहले
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शिप्रा शुद्धिकरण की उम्मीद जागी है। अब शिप्रा दूषित न हो और उसके घाट का रख-रखाव भी ठीक से हो इसके लिए ग्राम निवेश विभाग मास्टर प्लान तैयार करेगा। जिसके तहत हर घाट के प्रबंधन के लिए एक प्रबंध समिति होगी। जो उस घाट की देखरेख करेगी। यहीं नहीं शिप्रा के प्रति लोगों में जागरूकता लाने के लिए बृहस्पति भवन पर होने वाला लाईट एंड साउंड व अन्य आयोजन अब शिप्रा के घाटों पर होने लगेंगे।

ऐसे और भी कई निर्णय सोमवार को शिप्रा शुद्धिकरण न्यास की आठ साल बाद हुई बैठक में लिए गए। बैठक में समिति अध्यक्ष संभागायुक्त डॉ. रवींद्र पस्तौर ने हर महीने के पहले सोमवार को बैठक बुलाने के निर्देश दिए। मेला कार्यालय पर हुई इस बैठक में उन्होंने मंगलनाथ सहित अन्य घाटों से रेत के अवैध परिवहन को रोकने व शिप्रा किनारे राजस्व भूमि पर सघन पौधारोपण करने के निर्देश भी दिए।

शिप्रा की शुद्धता के लिए जिम्मेदारी तय हो
शुद्धिकरण के पहले यह जानना आवश्यक है कि शिप्रा मैली क्यों होती है। इस बरसाती नदी पर 12 डेम बने हैं। जब तक इसमें गंदे नालों का पानी मिलता रहेगा, तब तक यह मैली ही रहेगी। शिप्रा शुद्ध रहे, इसके लिए जिम्मेदारी का निर्धारण करना होगा। दिवाकर नातू, अध्यक्ष, सिंहस्थ मेला प्राधिकरण।

पीओपी की बजाय मिट्टी की बनें मूर्तियां
शिप्रा का जल प्रदूषित होने का एक प्रमुख कारण इसमें प्लास्टर ऑफ पैरिस की मूर्तियां विसर्जित होना भी है। हमें यह जागरूकता फैलाई जानी चाहिए कि गणेश उत्सव, दुर्गा पूजा आदि अवसरों पर स्थापित किए जाने वाली प्रतिमाएं मिट्टी की हो। मीना जोनवाल, महापौर

‘नमामि देवी नर्मदे’ यात्रा जैसा कार्यक्रम बने
शिप्रा नदी को शुद्ध एवं निरंतर प्रवाहमान बनाए रखने के लिए नमामि देवी नर्मदे यात्रा जैसा कार्यक्रम बने। शिप्रा के उद्गम से लेकर अनन्त तक किनारों पर सघन पौधा-वृक्षा रोपण हो। शिप्रा की शुद्धि के लिए जनता में जागरूकता फैलानी होगी।

जगदीश अग्रवाल, अध्यक्ष, उज्जैन विकास प्राधिकरण।

कुओं एवं बावड़ियों को भी स्वच्छ किया जाए
शिप्रा शुद्धिकरण के लिए सिंहस्थ के दौरान हुए प्रयासों को ही आगे बढ़ाए जाना चाहिए। शिप्रा के अलावा नगर के लगभग 150 कुएं-बावड़ियों को स्वच्छ करने की भी आवश्यकता है। न्यास की बैठक हर महीने बुलाई जाना चाहिए। सोनू गेहलोत, सभापति, नगर निगम

किसने क्या कहा
शिप्रा शुद्धिकरण की 550 करोड़ की योजना
शिप्रा शुद्धिकरण के लिए किए कार्यों की जानकारी देते हुए निगम कमिश्नर आशीष सिंह ने बताया कि इसके लिए 550 करोड़ की योजना बनाई गई है। इसकी डीपीआर तैयार करवाई जा रही है। इसके अन्तर्गत त्रिवेणी से लेकर कमेड़ तक एक ‘ट्रंक लाइन’ बनाई जाएगी, जिसके माध्यम से शहर के समस्त नालों का पानी शहर के बाहर ले जाया जाएगा तथा सदावल ट्रीटमेंट प्लांट में फिल्टर का पुन: नदी में छोड़ा जाएगा।

बैठक में यह जानकारी भी सामने आई
शिप्रा शुद्धिकरण न्यास के कोष में करीब 25 लाख रुपए थे। लेकिन इनमें से खर्च होते-होते अब राशि घटकर महज एक से डेढ़ लाख रुपए ही रह गई है।

शिप्रा बेसिन विकास के लिए एक योजना बनाई गई है। जिसमें उज्जैन एवं देवास जिलों की 52 पंचायतें तथा इन्दौर जिले की 04 पंचायतें शामिल हैं।

इसके अन्तर्गत शिप्रा घाटी को जैविक घाटी में बदला जाएगा। जिसमें जैविक खेती होगी। आसपास के सभी गांव खुले में शौच से मुक्त होंगे। सभी गांवों में नाडेफ, बायोगैस एवं ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की व्यवस्था होगी तथा नदी के दोनों ओर 500 मीटर क्षेत्र में फलदार वृक्ष लगाए जाएंगे।

कलेक्टर बोले सुझावों पर करेंगे अमल
कलेक्टर संकेत भोंडवे ने कहा कि समिति के सदस्यों द्वारा दिए गए सुझावों पर प्रमुखता से अमल किया जाएगा। घाटों पर लगाए गए लाल पत्थर भारी वाहनों के आने से टूटने की बात पर कलेक्टर ने यह भी कहा कि घाटों पर इन्हें रोकने के लिए बूम बैरियर लगाए जाएंगे। उज्जैन विकास प्राधिकरण के सीईओ अभिषेक दुबे ने कहा कि जो पत्थर टूट गए हैं, उनकी मरम्मत कराई जाएगी।

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