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विक्रम यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में आज पीएचडी की वे उपाधियां मिलेंगी जो मान्य नहीं

5 वर्ष पहले
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बीते दो साल में विक्रम विश्वविद्यालय से 442 शोधार्थियों ने पीएचडी की। इनमें से 192 को मंगलवार को होने जा रहे दीक्षांत समारोह में पीएचडी की उपाधि दी जाएगी लेकिन हकीकत में ये उपाधियां मान्य ही नहीं हैं। दरअसल विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नए मापदंड का पूरी तरह से पालन नहीं करने से प्रदेशभर के विश्वविद्यालयों की पीएचडी की उपाधियां साल 2009 से ही अपात्र करार दी जा रही है। अब प्रदेश की विश्वविद्यालयों की समन्वय समिति की इस मामले को उठाकर निराकरण किया जाएगा। शेष|पेज 13













विक्रम यूनिवर्सिटी



दीक्षांत समारोह में साल 2014 आैर 2015 में पीएचडी की उपाधियां पाने वालों को सम्मानित किया जाएगा। ये उपाधियां यूजीसी के न्यूनतम मापदंड के अनुसार नहीं होने के कारण उपाधियां पाने वाले इन धारकों को असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों के लिए भी पात्र तक नहीं माना जा रहा है। शेष|पेज 7















विक्रम यूनिवर्सिटी के अलावा प्रदेश की अन्य यूनिवर्सिटी में भी इसी प्रकार की स्थितियां हैं। जिसमें साल 2009 से 2012 के बीच रजिस्ट्रेशन करवाने आैर उपाधियां पाने वाले पीएचडी धारकों की उपाधियों पर पात्रता पर संकट खड़ा हो गया है।

मप्र, हिमाचल प्रदेश सरकार ने नहीं दी मान्यता

फरवरी 2015 में राजनीति विज्ञान विषय में पीएचडी करने वाले डॉ.जगदीश मासौदकर ने बताया उन्होंने एमपीपीएससी में 2015 में ही आवेदन किया था लेकिन अपने ही प्रदेश में इस उपाधि को मान्य नहीं किया जा रहा। हिमाचल प्रदेश में भी एप्लाई किया लेकिन यूजीसी के मापदंड के अनुसार नहीं होने से इसे मान्य नहीं किया। मानवाधिकार में 2015 में पीएचडी करने वाले डॉ. प्रकाश चौबे ने भी कहा कि शासन को इस दिशा में ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।



कुलपतियों ने कहा - समन्वय समिति में उठाएंगे मुद्दा

2009 से 2012 के बीच पीएचडी रजिस्ट्रेशन व उपाधि पाने का मुद्दा प्रदेश की अधिकांश यूनिवर्सिटी में चल रहा है। विक्रम यूनिवर्सिटी में 5 पाइंट्स वाला सर्टिफिकेट देना भी शुरू कर दिया है। आगामी समन्वय समिति की बैठक में यह मुद्दा रखा जाएगा।

- प्रो. एसएस पांडेय, कुलपति, विक्रम यूनिवर्सिटी

हमारी यूनिवर्सिटी में फिलहाल ऐसा कोई केस सामने नहीं आया कि जिसमें उनकी उपाधि को मान्य नहीं किया हो लेकिन प्रदेश के सभी पीएचडी धारकों के हित में इस संबंध में कोई निर्णय जरूर होना चाहिए। समन्वय समिति की बैठक में कोई भी कुलपति इस मुद्दे को उठाएंगे तो हम उनका समर्थन करेंगे।

- प्रो. एमडी तिवारी, कुलपति, बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी, भोपाल

यूजीसी ने जारी किए थे नए मापदंड लेकिन मप्र में तीन साल बाद लागू

यूजीसी ने एमफिल/पीएचडी की डिग्री अवार्ड करने के लिए यूजीसी रेगुलेशन 2009 को लागू करने के आदेश जून 2009 में जारी किए थे। भारत के गजट में भी जुलाई 2009 में इसका नोटिफिकेशन किया। यूजीसी के इस न्यूनतम मापदंड एवं प्रक्रिया (मिनिमम स्टैंडर्ड एंड प्रोसिजर रेगुलेशन) में एंट्रेंस एग्जाम से प्रवेश, रिसर्च मैथडोलॉजी का अध्ययन, आरडीसी व रजिस्ट्रेशन, स्तरीय शोध पत्रिका में दो शोध पत्रों का प्रकाशन, राष्ट्रीय स्तर की शोध संगोष्ठी में सहभागिता, दो परीक्षकों से जांच व उसमें से एक दूसरे राज्य का होना अनिवार्य, थीसिस सब्मिट करने से पहले डीआरसी के समक्ष प्रजेंटेशन सहित 11 बिंदु शामिल किए थे लेकिन समन्वय समिति (कोर्डिनेशन कमेटी) ने इस नियम को 2012 तक नहीं अपनाया। जिसके कारण 2009 से 2012 के बीच पीएचडी रजिस्ट्रेशन आैर उपाधियां पाने वाले धारकों को असिस्टेंट प्रोफेसर के पद के लिए शासकीय भर्तियों में अब मान्य नहीं किया जा रहा। इस मामले में उपाधि पाने वाले कुछ धारक हाईकोर्ट भी गए। न्यायालय से उन्हें यूजीसी के 11 में से 6 बिंदुओं की न्यूनतम पात्रता पूरी करने का प्रमाण पत्र देने के निर्देश दिए थे। जिसके बाद यूनिवर्सिटी ने कुछ उपाधि धारकों को प्रमाण पत्र भी दिए लेकिन यह प्रमाण पत्र भी अन्य प्रदेशों में मान्य नहीं किए जा रहे।

22वां दीक्षांत समारोह आज
विक्रम यूनिवर्सिटी का 22वां दीक्षांत समारोह मंगलवार सुबह 11.30 बजे से शुरू होगा। समारोह की अध्यक्षता कुलाधिपति व राज्यपाल ओपी कोहली करेंगे। उच्च शिक्षा मंत्री जयभान सिंह पवैया मुख्य अतिथि के रूप में दीक्षांत भाषण देंगे। मुख्य प्रशासनिक भवन परिसर में बने मंच पर दीक्षांत यात्रा के बाद समारोह शुरू होगा।











यूनिवर्सिटी में डेढ़ साल बाद दीक्षांत समारोह होने जा रहा है। इसके पहले 25 जुलाई 2014 को दीक्षांत समारोह हुआ था।

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