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मदिरा पान करने वाले भैरव दर्शन देने निकले, जेल के आगे रुकी पालकी

5 वर्ष पहले
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पूरे मार्ग होती रही फूलों की वर्षा
काल भैरव की सवारी में अखाड़े व झांकियां शामिल

भास्कर संवाददाता | उज्जैन

भोग के रूप में मदिरा पान करने वाले भगवान महाकाल के सेनापति प्रसिद्ध काल भैरव डोल ग्यारस पर सोमवार को भैरवगढ़ में भक्तों को दर्शन देने पालकी में सवार होकर निकले। केंद्रीय जेल के आगे भी भैरव की पालकी को कैदियों के दर्शन के लिए कुछ देर के लिए रोका गया।

मंदिर में कलेक्टर संकेत भोंडवे ने परिवार के साथ शासकीय पूजन किया। घटि्टया के एसडीएम एसआर सोलंकी, तहसीलदार राजाराम करजरे भी मौजूद थे। पूजन मंदिर के पुजारी सदाशिव व धर्मेंद्र चतुर्वेदी ने कराया। सलामी के बाद शाम 4 बजे मंदिर प्रांगण से बाबा की सवारी शुरू हुई। आगे तोपची, मार्च पास्ट करते सशस्त्र जवानों की टुकडिय़ां, बैंड, ढोल, अखाड़े, भजन मंडलियों व झांकियों के साथ भक्त पैदल भैरवनाथ के जयकारे लगाते निकले। पालकी के अंदर भगवान भैरवनाथ का बटुक रूप में चांदी का मुघौटा और चरण पादुकाएं थीं।

सवारी भैरवगढ़ जेल तिराहे पर रुकी, जहां जेल प्रशासन की ओर से पूजन किया गया। कैदियों को दर्शन कराने के लिए पालकी को जेल के गेट तक ले जाया गया। रात 10 बजे सवारी पुन: कालभैरव मंदिर पर समाप्त हुई। मंदिर के पंडे-पुजारियों ने बताया वर्ष में दो बार भैरव अष्टमी और डोल ग्यारस पर परंपरा अनुसार भैरवगढ़ में सवारी निकलती है।

बाबा कालभैरव जब दर्शन देने निकले तो पूरे सवारी मार्ग पर श्रद्धालुओं ने फूलों से स्वागत किया।

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