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सड़कों काे जस का तस बनाने का फायदा नहीं

7 वर्ष पहले
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भासं. उज्जैन. सिंहस्थके लिए शहरी सड़कों पर पैसा तो खर्च किया जा रहा है लेकिन यदि चौड़ीकरण नहीं होता है तो कोई फायदा नहीं मिलेगा। पीडब्ल्यूडी जितनी भी सड़कें बनाने जा रहा है, सब जस की तस स्थिति में ही बनेंगी। चौबीस खंभा से हरसििद्ध होकर जयसिंहपुरा वाली सड़क 80 फीट चौड़ी होना थी लेकिन उसे भी मौजूदा स्थिति में ही बना दिया। एमआर-2 (नानाखेड़ा से भरतपुरी) को कांक्रीट रोड बनाने की जरूरत है। नीलगंगा से नानाखेड़ा वाले रोड का भी चौड़ीकरण नहीं किया जा रहा, जबकि यह मार्ग सिंहस्थ में बहुत उपयोगी होगा।

यह सुझाव सोमवार को सिंहस्थ मेला प्राधिकरण द्वारा 2004 सिंहस्थ समितियों में रहे सदस्यों और समाजसेवियों की बैठक में दिए गए। बृहस्पति भवन में हुई बैठक में मेला अधिकारी अविनाश लवानिया और कलेक्टर कवींद्र कियावत मौजूद थे। कियावत ने सदस्यों से यह जानना चाहा कि 2004 में क्या परेशानियां आई थी और उनका क्या निदान है। सदस्यों ने अनुभव बताए। बैठक में अध्यक्ष दिवाकर नातू, पूर्व महापौर मदनलाल ललावत, अर्जुनसिंह चंदेल, राजेंद्र कोठारी, सुरेंद्र चतुर्वेदी, जेपी राठी, जयप्रकाश जूनवाल, तरुण उपाध्याय, विनोद चौरसिया, दिलीप भार्गव, शील लश्करी, सशा जैन, दीपक शर्मा, सुरेंद्र सांखला, मुकुंद जिंदल शामिल थे।

सेवरखेड़ी डेम और विकल्प त्रिवेणी पुराना ब्रिज

सदस्योंने पेयजल और स्नान के लिए पानी की उपलब्धता पर जोर दिया। 2015 में भी कम बारिश होती है तो विकल्प तैयार होना चाहिए। सेवरखेड़ी डेम बनाने की संभावना हो तो त्रिवेणी के पुराने ब्रिज को स्टापडेम बनाकर शिप्रा का पानी रोका जाना चाहिए। खान का डायवर्सन जरूरी है। गंभीर के पानी का दुरुपयोग रोका जाना जरूरी है।

सांस्कृतिककार्यक्रमों के लिए स्थान

सिंहस्थके दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए जगह का चयन मेला क्षेत्र में हो जहां अधिक से अधिक लोग लाभ ले सकें। 2004 में उजड़खेड़ा में केंद्र बनाया था जहां यात्री पहुंच ही नहीं सके।

जमीनका अधिग्रहण और मुआवजा

पूर्वसदस्यों का कहना था कि जमीन रामघाट और दत्त अखाड़ा घाट से नदी किनारे के पास ही अधिक होना चाहिए। इसके अलावा जहां 1980 के बाद काॅलोनियां और मकान बन चुके हैं, उन्हें वैधानिक घोषित कर सिंहस्थ क्षेत्र से बाहर करना चाहिए। जिनकी जमीन और भवन अधिगृहीत किए जाएं, उन्हें समय पर मुआवजा भी दिया जाए।

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