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बायपास पर संतों के शिविर, फिर भी अंधेरा

5 वर्ष पहले
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अंधेरे का बायपास
सिंहस्थ के लिए करोड़ों रुपए के कामकाज शहर में चल रहे हैं लेकिन जिस बायपास मार्ग पर कई बड़े साधु-संतों के पड़ाव लगना है उस पर उजियारा करने के मामले में जिम्मेदार बेपरवाह बने हुए हैं। हैरानी इसलिए भी है कि शहर से लेकर केंद्र तक की सत्ता होने के बावजूद जिम्मेदार अब तक केवल आश्वासन भर देते नजर आ रहे हैं। लिहाजा आम लोग अंधेरे में ही बायपास से निकलने पर मजबूर हैं।

सिंहस्थ-2016 के अंतर्गत 110 करोड़ रुपए की लागत से एमपीआरडीसी की ओर से हरिफाटक मार्ग से उन्हेल पहुंच मार्ग तक सिंहस्थ बायपास का निर्माण किया गया है, जिससे श्रद्धालु सीधे इंदौर रोड फोरलेन से बड़नगर रोड तक आैर उन्हेल-नागदा रोड पर आ-जा सकेंगे। निर्माण के बाद इस बायपास पर स्ट्रीट लाइटें भी लगाई जाना थीं लेकिन अब तक लाइटें नहीं लगी। हद तो तब हो गई जब बायपास को शुरू करवा कर वाहन चालकों से टोल टैक्स लेना भी शुरू करवा दिया गया। ऐसी स्थिति में वाहन चालक बगैर किसी सुविधा के टोल टैक्स देकर अंधेरे से भरे इस बायपास से निकलने पर मजबूर हैं। इसी बायपास मार्ग पर महामंडलेश्वर पायलट बाबा, दद्दाजी सहित कई प्रमुख साधु-संतों के पड़ाव स्थल लगेंगे। साधु-संतों आैर अनुयायियों का आना-जाना भी शुरू हो चुका है लेकिन जिम्मेदार स्ट्रीट लाइट लगाने के मुद्दे पर निर्णय नहीं ले पाए हैं। एमपीआरडीसी के अधिकारी इसे अपना काम नहीं बताकर पल्ला झाड़ चुके हैं तो दूसरी तरह बिजली कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि उन्हें अब तक कोई निर्देश नहीं मिले हैं।

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