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नोटबंदी के कारण अटके थे योजनाओं के स्वीकृत ऋण, अब गति आएगी

5 वर्ष पहले
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नाेटबंदी के कारण सरकारी योजनाओं से बेरोजगार युवाओं को मिलने वाले ऋण स्वीकृत होने के बाद अटक गए है। बैंक अधिकारी पिछले डेढ़ माह से बैंकों में भीड़ प्रबंधन और ग्राहकों की अन्य जरूरतों को पूरा करने में व्यस्त है। लीड बैंक प्रबंधक ने सभी बैंकों को निर्देश दिए है कि रुके हुए ऋण आवेदनों का जल्द निपटारा किया जाए।

मुख्यमंत्री युवा उद्यमी, मुख्यमंत्री आर्थिक कल्याण, मुख्यमंत्री स्वरोजगार, मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास और प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना के अंतर्गत हर बैंक में बेरोजगार युवाओं और महिलाओं ने ऋण आवेदन किए है। यह आवेदन स्वीकृत भी हो गए है। ऋण राशि नवंबर में हितग्राहियों को मिल जाना चाहिए थी। 8 नवंबर को 1 हजार और 500 के नोट बंद होने के बाद बैंकों में अस्थिरता आ गई। जिसके कारण सैकड़ों बेरोजगार युवाओं को ऋण नहीं मिल पाया है। छोटे बड़े सभी प्रकार के ऋण रुक जाने के कारण हितग्राही ही परेशान है। लीड बैंक मैनेजर आर.के. तिवारी ने बताया नोटबंदी के कारण बैंकों में नोट जमा करने और निकालने वालों की भीड़ के कारण बैंकर्स इतने व्यस्त है कि अन्य बैंकिंग कार्यों के लिए समय नहीं निकाल पा रहे थे। कुछ ही दिनों में स्थिति सामान्य हो जाएगी।

इनके रूके ऋण
अमित बलसारा ने 30 लाख का ऋण आवेदन किया है। बैंक ने प्रोजेक्ट रिपोर्ट देखकर ऋण नवंबर के पहले सप्ताह में स्वीकृत कर दिया था। लेकिन नोटबंदी से ऋण अटक गया। इसके कारण वे अपना उद्योग शुरू करने में 1 माह लेट हो गए है।

हितेश राठौर ने डिस्पोजल के लिए 15 लाख रुपए के ऋण का आवेदन किया है। राठौर ने इसके आगर रोड़ उद्योगपुरी क्षेत्र में लीज पर जमीन ली है। नोट बंदी के कारण व्यापार शुरू करने में 1 माह लेट हो गए।

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