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शास्त्रीय नाट्य समारोह : युद्ध भूमि में कर्ण की संवेदनाओं को अभिनय से साकार किया

4 वर्ष पहले
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उज्जैन | राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय नईदिल्ली आैर कालिदास संस्कृत अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में हो रहे छह दिनी शास्त्रीय नाट्य समारोह के अंतर्गत शुक्रवार शाम कालिदास अकादमी के संकुल हॉल में मलयालम भाषा में कर्णभारम् नाटक की प्रस्तुति हुई। लोकधर्मी समूह, कोच्चि के कलाकारों ने महाभारत के पात्र कर्ण के जीवन आैर युद्ध भूमि में कर्ण की हृदय संवेदनाओं को मंच पर प्रस्तुत किया। एक घंटा पांच मिनट की अवधि वाले महाकवि भास के इस नाटक का निर्देशन चंद्रदासन् ने किया। नाटक का कथानक महाभारत के युद्ध क्षेत्र में 16वें दिन पर आधारित था। जिसमें कर्ण कौरवों की ओर से युद्ध के लिए प्रस्थान करते हैं। कर्ण पल भर के लिए युद्ध की निरर्थकता से द्रवित हो जाता है, जहां मनुष्य एक-दूसरे का वध करते हैं। ब्राह्राण के वेश में इंद्र छलपूर्वक कर्ण से उसके दिव्य कवच-कुंडल ले जाते हैं। कर्ण इस बात को समझता है कि पूरी योजना भगवान श्रीकृष्ण की है आैर इस तरह वह अपने प्रारब्ध को स्वीकार कर लेता है। कर्ण के मुख्य किरदार में सेल्वाराज वी.आर. ने कर्ण के अलावा सुधीर बाबू, जुमेश चित्तुरन, चिगिन सुकुमार, मदन कोलाविल, कन्नटा कालेश, फरहा अजीज, जॉली एन्टनी, श्रीदीप पीएस, संतोष पीरावम, प्रदीप श्रीनिवासन आदि ने किरदार निभाए। शनिवार शाम 7 बजे मृच्छकटिकम्-मिट्टी दी गडीरा की पंजाबी भाषा में प्रस्तुति दी जाएगी।

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