आयुर्वेद कॉलेज में आया सीसीआईएम का दल, निरीक्षण कर रजिस्टर भी देखे
मंगलनाथ रोड स्थित शासकीय धनवंतरि आयुर्वेद महाविद्यालय में सेंट्रल काउंसिल ऑफ इंडियन मेडिसिन (सीसीआईएम) के तीन सदस्यीय दल का दो दिवसीय निरीक्षण शनिवार से शुरू हो गया। दल ने कॉलेज का निरीक्षण कर उपस्थिति रजिस्टर भी जांचे।
सीसीआईएम के निरीक्षण दल में डॉ. निरंजन त्यागी (उप्र), डॉ. विश्वजीत ओघड़ (हरियाणा) आैर डॉ. बतोराज हीरामठ (नईदिल्ली) शामिल हैं। शुक्रवार रात आए दल ने शनिवार सुबह कॉलेज पहुंच कर निरीक्षण शुरू किया। दल ने सभी विभागों का निरीक्षण किया। इस दौरान विद्यार्थियों की संख्या, उपस्थिति रजिस्टर, शिक्षकों व स्टॉफ की स्थिति सहित अन्य जानकारियां ली। इसके अलावा दल ने कॉलेज के अस्पताल का भी निरीक्षण कर मरीजों की संख्या, रजिस्टर में उनकी इंट्री, डॉक्टरों की संख्या व अन्य जानकारियां एकत्रित की। दल रविवार को भी निरीक्षण करेगा। निरीक्षण दल जांच के बाद अपनी रिपोर्ट केंद्रीय समिति को देगा। इसी रिपोर्ट के आधार पर मान्यता तय की जाती है। कॉलेज में निरीक्षण के दौरान मीडिया प्रभारी डॉ. प्रकाश जोशी ने दल के सदस्यों को स्मृति चिन्ह भेंट किए। इस दौरान कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य डॉ. आरएस चौहान, डॉ. ओपी व्यास, डॉ. शिरोमणि मिश्रा, डॉ. रामतीर्थ शर्मा, डॉ. नृपेंद्र मिश्र, डॉ. सुनीता डी. राम, डॉ. योगेश वाणे, डॉ. नरेश जैन, डॉ. आशीष शर्मा, डॉ. प्रीति जैन, डॉ. संगीता गुप्ता, डॉ. निरंजन सर्राफ, डॉ. सलिल जैन आदि भी उपस्थित थे।
स्टॉफ की कमी, एमडी की मान्यता पर फिर सवाल
कॉलेज को पिछले करीब सात वर्षों से स्टॉफ की कमी के कारण एमडी की मान्यता नहीं मिल पा रही है। बीएएमएस में 20 सीटें बढ़कर जरूर अब 60 सीटें हो गई हैं लेकिन एमडी की मान्यता पर अभी भी सवाल खड़े हो रहे हैं। एमडी के लिए करीब 36 लोगों का स्टॉफ चाहिए जबकि वर्तमान में केवल 28 का ही स्टॉफ कॉलेज में है। ऐसी स्थिति में इस बार भी एमडी की मान्यता मिलना मुश्किल है। आयुष मेडिकल एसोसिएशन के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. राकेश पांडेय ने बताया कॉलेज प्रशासन आैर प्रदेश शासन की ही नाकामी है कि उज्जैन में एमडी आयुर्वेद सात वर्षों से जीरो सेशन जा रहा है आैर बीएएमएस की मान्यता भी सशर्त है। मान्यता के लिए प्रयास तेज होना चाहिए।