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जिसे मुख्यमंत्री ने गृह प्रवेश कराया, उन्हें अफसरों ने पीएम आवास योजना का पूरा पैसा तक नहीं दिया

4 वर्ष पहले
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भैयालाल के बेटे रूपेश के मन की बात

मैं
उज्जैन में एक दिन पहले शुक्रवार को जिस भैयालाल कटारिया को मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने गृह प्रवेश कराया था, उन्हें अफसरों ने प्रधानमंत्री आवास योजना का पूरा पैसा तक नहीं दिया। इतना ही नहीं मकान पूरा बनाने का इतना ज्यादा दबाव बनाया कि उन्हें बाजार से कर्ज लेकर काम पूरा कराना पड़ा। अब लोग फोन कर रुपया मांग रहे हैं। इससे पूरे परिवार का सुकून खो गया है। वे बार-बार बैंक जाकर आवास योजना की आखिरी किस्त 30 हजार रुपए खाते में डालने की जानकारी ले रहे हैं।

मुख्यमंत्री से कहना चाहती थीं कर्ज की बात, अफसरों ने रोक दिया: कर्ज लेकर मकान बनाने की बात भैयालाल की प|ी खिम्मीबाई मुख्यमंत्री से कहना चाहती थी लेकिन अफसरों ने उन्हें रोक दिया। खिम्मीबाई ने बताया- अफसर बोले थे, अपनी परेशानी उन्हें मत बताना। बाद में हमें बताना। सीएम के कार्यक्रम के बाद कोई भी अफसर पलटकर नहीं आया।

कर्ज की चिंता में घर में बैठे भैयालाल और परिवार के सदस्य।

सीएम हेल्पलाइन में करेंगे शिकायत
रूपेश का कहना है अफसरों ने उनकी हैसियत से ज्यादा खर्च कराकर मकान बनवा दिया। अफसर बोले भी थे कि सरकारी लोन दिला देंगे। अब इसकी शिकायत मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में करेंगे।

जारी कर दी है किस्त, मिल जाएगी
निगम आयुक्त विजय कुमार जे ने कहा जिस दिन मुख्यमंत्री आए, उसी दिन पीएम आवास योजना की अंतिम किस्त जारी कर दी थी। एक-दो दिन में मिल जाएगी।

मुख्यमंत्री के आने से हम कर्ज में डूब गए, फोन घनघना रहे हैं, अफसर पलटकर नहीं आए
(रूपेश कटारिया) अपने परिवार के साथ आनंदनगर में टूटे-फूटे चद्दर के मकान में रहा था। पिता (भैयालाल कटारिया) बीमार है, इसलिए काम नहीं कर पाते। मां दूसरों के घरों में काम कर थोड़ा कमा लेती है। मैं मजदूरी करता हूं। आमदनी कम है लेकिन माता-पिता सहित प|ी लक्ष्मी, बेटी अनुष्का, भूमिका और बेटे कुणाल के साथ खुश था। गरीबी में गुजर बसर हो रहा था लेकिन सिर पर कर्जा नहीं था। जब प्रधानमंत्री आवास योजना के बारे में सुना तो आवेदन कर दिया। सोचा ढाई लाख रुपए में पक्की छत बन जाएगी। एक लाख रुपए की पहली किस्त मिली, जो छत बनने से पहले ही खत्म हो गई। अफसर बोले- दूसरी किस्त चाहिए तो छत बनाओ। बाजार से एक लाख रुपए कर्जा लिया, छत बनाई। तब दूसरी किस्त के रूप में 75 हजार मिले। इससे मकान का थोड़ा काम आगे बढ़ा। अफसरों ने 45 हजार रुपए की तीसरी किस्त दी लेकिन मकान पूरा नहीं हुआ। अफसर आए, बोले- आपके मकान का चयन हुआ है, आपको गृह प्रवेश कराने मुख्यमंत्री आएंगे। मैंने कहा- साहब, 30 हजार रुपए की चौथी और आखिरी किस्त दे दो तो मकान का बाकी काम करा लें। अफसरों ने कहा- वह बाद में मिलेगी, आप पहले मकान का काम पूरा कराओ। मजबूरन कर्ज लेकर मकान के भीतर प्लास्टर, खिड़की, दरवाजे का काम कराया। अब अफसरों की मांग थी कि बाहर का प्लास्टर और बिजली फिटिंग भी कराओ। हमने मना कर दिया। अफसरों ने खुद काम लगवा दिया, बोले- चौथी किस्त से काट लेंगे। मन में इस बात की खुशी थी कि प्रदेश के मुखिया हमारे घर आ रहे हैं लेकिन इस बोझ से दिल बैठा जा रहा था कि सिर पर डेढ़ लाख से ज्यादा का कर्ज हो गया। शनिवार को सुबह से फोन घनघना रहे हैं। लोग उधार दिया पैसा मांग रहे हैं। कह रहे हैं आपके यहां मुख्यमंत्री आए थे, क्या हमारा रुपया नहीं लौटा सकते। उन्हें जवाब देते-देते थक गया हूं।

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