हैदरगढ़। जिला मुख्यालय से 55 किमी दूर तथा हैदरगढ़ से लगभग दो किमी दूर स्थित मृगन्नाथ धाम की सुरम्य पहाडिय़ों से गिरने वाला प्राकृतिक झरना इन दिनों पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। 200 मीटर ऊंची पहाड़ी से गिरने वाले मनोरम झरने को देखने तथा प्रकृति का आनंद उठाने केवल ग्यारसपुर तहसील क्षेत्र बल्कि जिले भर से लोग यहां निरंतर रहे हैं। झरने के नीचे प्राकृतिक कुंड बने हुए हैं जो ज्यादा गहरे होने के कारण स्नान के लिए आदर्श स्थान बने हुए हैं।
पहाड़ी में विद्यमान सिद्ध देवताओं की प्रतिमाएं भी लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। पहाड़ी पर उकेरी गई हनुमानजी की प्रतिमा भी लोगों को श्रद्धा से अभिभूत कर देती है। श्रद्धालुओं ने प्रतिमा पर मंदिर का निर्माण कर दिया है। इनके अलावा भगवान भोलेनाथ, पार्वती, गणेश तथा कार्तिकेय का परिवार विद्यमान है।
मंदिर तक पहुंचने के लिए पुल बनाया गया है जिसके नीचे से झरना बहता है। पास ही धर्मशाला, यज्ञशाला एवं विशाल मंदिर का निर्माण कराया गया है। जिसमें अभी प्रतिमा की स्थापना होना बाकी है। गोशाला तथा अन्य धार्मिक स्थान भी लोगों के आकर्षण का केंद्र है।
रहता है बंदरों का जमघट : इस प्राकृतिक सुरम्य स्थल पर फैली हरियाली तथा ऊंचे-ऊंचे वृक्षों की लंबी कतारों पर करतब दिखाते नटखट बंदरों की टोली भी लोगों को लुभाती है। रंगबिरंगे पक्षियों का कलरव भी आल्हादकारी है। तालाब भी अत्यंत आकर्षण का केंद्र है।
उपेक्षा से विकसित नहीं हो पा रहा है स्थान : प्रकृति की गोद में बसे इस मनोरम स्थान के बारे में ज्यादा लोगों को जानकारी मिले इस दिशा में राजनैतिक तथा प्रशासनिक स्तर पर विशेष प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। इस पर्यटन स्थल तक पहुंचने के लिए कोई व्यवस्थित एपरोच रोड नहीं है। लोगों को हैदरगढ़ से पैदल चलकर यहां तक पहुंचना पड़ता है। इसी प्रकार यहां तक बिजली अब तक नहीं पहुंच पाई है।
प्राकृतिक तालाब प्रदूषित हो रहा है उसकी सफाई तथा गहरीकरण का इंतजाम भी किया जाना आवश्यक है। जनप्रतिनिधि यहां आते और आश्वासन देकर जाते हैं लेकिन बाद में कोई प्रयास इस स्थान के विकास के लिए नहीं हो पा रहे हैं।
हैदरगढ़। मृगन्नाथ धाम की पहाड़ी पर बह रहा 200 मीटर ऊंचे झरने से पानी।