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नवरात्रि पर इस बार हर दिन खास संयोग

7 वर्ष पहले
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नवरात्रिइस बार आठ दिनों की है। नौवें दिन दशहरा रहेगा। पंडितों के अनुसार 25 सितंबर को हस्त नक्षत्र, ब्रह्म योग में घटस्थापना के साथ नवरात्रि की शुरुआत होगी। इसके बाद आठ दिन तक सर्वार्थसिद्धि, आयुष्मान, सौभाग्य, ब्रह्म, शोभन और गजकेसरी योग जैसे दुर्लभ संयोग में नवरात्रि मनेगी। पंडितों के अनुसार यह सब योग श्रेष्ठ हैं। नवरात्रि में देवी का आशीर्वाद तो मिलेगा ही खरीदारी भी श्रेष्ठ है। 3 अक्टूबर को नवमी युक्त दशहरा मनेगा।

गजकेसरीयोग

पंडितपंकज शर्मा शास्त्री के अनुसार 26 सितंबर को सुबह 8.33 बजे से तुला का चंद्रमा शुरू हो जाएगा। यह 28 को शाम 5.22 बजे तक रहेगा। इस तरह तीन दिनों तक गजकेसरी का संयोग रहेगा।

सर्वार्थसिद्धि:हर कार्य को सिद्ध करने वाला है।

गजकेसरी: कार्य में स्थायित्व प्रदान करने वाला।

शोभन: सभीकार्य के लिए शुभ।

सौभाग्य: सुख-समृद्धि प्रदान करने वाला।

ब्रह्म: कार्य में शुभ स्थायित्व प्रदान करता है।

आयुष्मान: आयु,आरोग्य, ऐश्वर्य की वृद्धि करता है।

घट स्थापना के शुभ मुहूर्त

पंडितविनोद शास्त्री ने बताया कि आश्विन नव रात्रि को शारदीय नव रात्रि भी कहते हैं। नव रात्रि में पहले दिन शैल पुत्री, दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी, तीसरे दिन चंद्र घंटा, चौथे दिन कूष्मांडा, पांचवें दिन स्कंद माता, छंठवें दिन कात्यानी, सातवें दिन काल रात्रि, आठवें दिन महागौरी और नवमें दिन सिद्धिदात्री के रूपों में पूजा की जाती है। उन्होंने बताया कि घट स्थापना के शुभ मुहूर्त गुरुवार को सुबह बजे से ७.३० शुभ का चौघडिय़ा, दोपहर १२ से १.३० बजे तक लाभ का चौघडिय़ा, शाम को ४.३० से बजे तक शुभ का चौघडिय़ा, शाम बजे से ७.३० तक अमृत का चौघडिय़ा।

महाष्टमी-महानवमीभी खास

पं.किशोर जोशी के अनुसार 2 अक्टूबर को महाष्टमी दोपहर 12.07 बजे तक है। यह मूल नक्षत्र युक्त है। साथ में पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र भी है। इसके बाद महानवमी शुरू होगी। महागौरी-सिद्धि दात्री का एक साथ पूजन होगा। रात 9.52 बजे उत्तराषाढ़ा नक्षत्र भी शुरू हो जाएगा।

किस दिन कौन-सा संयोग

25सितंबर(प्रतिपदा): ब्रह्मयोग, हस्त नक्षत्र।

26 सितंबर (द्वितीया): गजकेसरी योग।

27 सितंबर (तृतीया): सर्वार्थसिद्धि।

28 सितंबर (चतुर्थी): गजकेसरी। विनायक चतुर्थी।

29 सितंबर (पंचमी):ललितापंचमी, सर्वार्थसिद्धि।

30 सितंबर (षष्ठी): आयुष्मान।