विदिशा। देवी का बाग वाली विजयासन माता, की पूजा करने स्वयं पेशवा यहां पड़ाव के दौरान आते थे। मैया खुले में इमली के पेड़ तले रहना ही पसंद है। देवी के चारों ओर दीवाल और सिर पर छत डालने की कोशिश जब भी की गई वह टिक नहीं सकी।
अत्यंत सिद्ध स्थान माने जाने वाले इस मंदिर में लोग मन्नत पूरी होने पर घंटा चढ़ाते हैं। यहां लटकने वाले अनगिनत छोटे-बड़े घंटे इस आस्था की गवाही देते हैं।
पूजा का दायित्व वर्षों से पं. राममनोहर चतुर्वेदी संभाल रहे हैं। इसी परिसर के पास डंडा साईं का स्थान, दूल्हादेव, शंकरजी तथा गणपति की प्रतिमाएं भी स्थापित है।
(विदिशा। देवीके बाग वाली माताजी।)