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सात साल पहले बना बीना पुल बदहाल

7 वर्ष पहले
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खुरईमार्ग पर स्थित बीना नदी का पुल आए दिन होने वाले हादसों की वजह से डेंजरजोन के नाम से कुख्यात हो गया है। इसी मार्ग पर सात साल पहले बना बीना नदी का पुल यातायात के अत्यधिक दबाव तथा ठीक से रखरखाव होने की वजह से अत्यंत खस्ता हालत में पहुंच गया है।

पुल पर गहरे गड्ढे उभर आए हैं। कांक्रीट से लोहे के सरिए बाहर निकल आए हैं। जिनसे उलझकर आए दिन बाइक चालक दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं तथा उनके पहिए पंचर हो रहे हैं। पुल पर रैलिंग नहीं है। बिना रैलिंग के पुल से कोई वाहन गिरकर कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।

बढ़ाहै यातायात का अत्यधिक दबाव: बीनारिफायनरी की वजह से इस मार्ग पर यातायात का अत्यधिक दबाव बना हुआ है। भारी सामान लेकर लोडेड ट्रक और बड़े ट्राले यहां से गुजरने लगे हैं। इसी तरह गंजबासौदा, भोपाल, विदिशा, ग्यारसपुर, रायसेन, सांची को जोडऩे के कारण पठारी-खुरई मार्ग पर वाहनों का दबाव अत्यधिक बढ़ गया है। इस स्थिति में खस्ताहाल पुल की स्थिति को देखते हुए आशंका बनी रहती है कि वह अधिक समय तक वाहनों का बोझ नहीं सह पाएगा।

डा. नितिन भारद्वाज 16 सितंबर को इसी पुल से हादसे का शिकार होते-होते बचे थे। इस तरह का हादसा उनके साथ दूसरी बार हुआ है। बस ड्राइवर सलीम का कहना है कि पुल से गुजरते समय हादसे का डर बना रहता है। इसी आशंका के चलते वे पुल से अत्यधिक धीमी गति से बस निकालते हैं। यह पुल सागर और विदिशा जिले की सीमा के विवाद में अब तक उपेक्षित है। दोनों जिलों के अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं।

सागर जिले की है जिम्मेदारी

^यहपुल सागर जिले में आता है। इसके रखरखाव की जिम्मेदारी वहीं के लोक निर्माण विभाग की है। एसकेरावत, उपयंत्रीपीडब्ल्यूडी, गंजबासौदा