जिला अस्पताल में इलाज की जगह 90 फीसदी को कर देते हैं रेफर
जिला अस्पताल में इलाज की जगह 90 फीसदी को कर देते हैं रेफर
अनुराग शर्मा|विदिशा
जिले में स्वास्थ्य सेवाओं के हाल सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं। यहां ज्यादातर मरीजों काे इलाज करने की बजाय उन्हें रेफर किया जा रहा है। यही वजह है कि हर महीने 150 से अधिक मरीज भोपाल रेफर हो रहे हैं। खास बात यह है कि प्रदेश में सबसे ज्यादा मरीजों के रेफर होने वाले जिलों में विदिशा शामिल है। इनमें 90 फीसदी से अधिक मरीजों को 108 एंबुलेंस से रेफर किया जा रहा है।
जिले में कुल 12 एंबुलेंस 108 सेवा के तहत संचालित हैं। इस एंबुलेंस सेवा के तहत किसी भी आपातकालीन घटना में बेहतर इलाज की उम्मीद से जिला अस्पताल तक मरीजों को लाया जाता है। लेकिन यहां से भी मरीजों को भोपाल रेफर होना पड़ता है। 108 सेवा पूरी तरह से निशुल्क है। इस वजह से इस सेवा का उपयोग रेफर के लिए ज्यादा किया जा रहा है। जबकि रेफर करने के फेर में कई बार ऐसी स्थिति तक बन जाती है कि आपातकालीन घटनाओं में जरूरत पड़ने पर गंभीर पीडितों को 108 एंबुलेंस ही नहीं मिल पाती है। इस स्थिति से अंदाजा लगाया जा सकता है कि जिले में पीड़ितों व मरीजों की सेहत को लेकर स्वास्थ्य विभाग कितना गंभीर है।
इन मामलाें के लिए 108 की जरूरत
गंभीर घायलाें को स्पाट से तुरंत अस्पताल लाने के लिए की थी 108 की शुरुआत। 108 सेवा का मुख्य उद्देश्य लोगों की जान बचाने, आपराधिक व आग की सूचनाएं देने के लिए हैं। इसके तहत गंभीर घायलों, ह्रदय गति रुकने, पक्षाघात, श्वसन विषयक, मधुमेह, गर्भावस्था, नवजात एवं शिशुओं, मिर्गी, बेहोश होने, जानवरों के काटने, उच्च ज्वर, संक्रमण, जलना, रास्ते पर झगड़े होना, स्वयं को जख्मी करना, आत्महत्या का प्रयास, मारपीट, ट्रैफिक समस्या, दंगा, लगना, लगाना आदि मामलों में 108 की सेवा ली जाती है। जिले में 10 मार्च 2013 से सेवा शुरू हुई तब से लेकर 31 जनवरी 2016 तक कुल 41 हजार 155 केस 108 एंबुलेंस विभिन्न अस्पतालों में लेकर पहुंची है।
विदिशा में रेफर के मामले ज्यादा हैं
जब से 108 सेवा शुरू हुई है तब से लेकर अभी तक 41 हजार से अधिक केस 108 एंबुलेंस लेकर आई हैं। कई मामलों में विदिशा से रेफर हुए मरीजों को ले जाने में उपयोग हो रहा है। डॉ. सौरभ श्रीवास्तव, डिस्ट्रिक्ट मैनेजर 108
हेड इंज्युरी के मामलों में रेफर
जिला अस्पताल में आने वाले ज्यादातर रेफर के केस हेड इंज्युरी से संबंधित मरीजों के होते हैं। यदि मरीजों को अनावश्यक रेफर किया जा रहा है, तो इसकी जानकारी ली जाएगी। डॉ. शेखर जालवणकर, सिविल सर्जन विदिशा
मामलों पर एक नजर
माह रेफर संख्या
नवंबर 180
दिसंबर 147
जनवरी 170
फरवरी अभी तक 45
दो एंबुलेंस पर हर माह सवा लाख का डीजल खर्च
जिले में वैसे तो 12 एंबुलेंस 108 सेवा के तहत संचालित हैं। इनमें सबसे ज्यादा डीजल जिला मुख्यालय पर संचालित 108 एंबुलेंस पर खर्च हो रहा है। पूरे प्रदेश में सिर्फ विदिशा में ही एक एएलएस (एक्टिव लाइफ सपोर्ट) 108 एंबुलेंस पर सर्वाधिक 1165 लीटर डीजल एक माह में खर्च होने का मामला सामने आया है। जो रेफर की वजह से होना बताया जा रहा है। शहर की दोनों 108 एंबुलेंस पर हर माह महज डीजल पर 1 लाख 30 हजार रुपए खर्च हो रहा है। इसमें करीब 70 फीसदी डीजल रेफर के मामलों में हो रहा है। यही वजह है कि रेफर में अधिक उपयोगिता के चलते शहर की ये दो एंबुलेंस औसतन एक माह 90 से 100 केस लेकर आ रही हैं, जबकि अन्य एंबुलेंस 150 केस लेकर आ रही हैं।
108 एंबुलेंस सेवा | दुर्घटना और आपात स्थिति में मदद करने के लिए तैनात की गई हैं 108 वाहन
उद्देश्य से भटकी 108 एंबुलेंस सेवा भोपाल रेफर करने में हो रहा उपयोग