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वििदशा| दु:खमन का धर्म है आत्मा का नहीं। मनुष्य दुख

7 वर्ष पहले
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वििदशा| दु:खमन का धर्म है आत्मा का नहीं। मनुष्य दुख में ईश्वर का स्मरण करता है। इससे उसका परमात्मा से अनुसंधान होता है और उसे आनंदानुभूति होती है। जीव का स्वभाव सुंदर नहीं है परमात्मा के कुछ अवतार जैसे कूर्मावतार वराह अवतार यद्यपि देखने के सुंदर हों तदापि परमात्मा का स्वभाव सुंदर ही नहीं वरण अतिशय सुंदर है। उक्त उद्गार भागवत भूषण कथा पं. संतोष शास्त्री ऋषि ने भागवत कथा में व्यक्त किए।

उन्होंने कहा कि दुसरों के दुख का कारण प्रभु का स्वभाव है, इसलिए तो भगवान वंदनीय और पूज्यनीय हैं। आध्यात्मिक आदि वैदिक तथा आदि भौतिक तीनों प्रकार के तपों का नाश करने वाले श्री कृष्ण की वंदना करने से पाप ताप जलते हैं। श्रीमद्भागवत कथा शुरू होने से पहले नंदवाना स्थित श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर से शुरू हुई कलश यात्रा शहर के मुख्य मार्गों से होती हुई श्री राधा देवी परिसर में जाकर समाप्त हुई।

विदिशा। श्रीमद्भागवत कथा से पूर्व निकाली कलश यात्रा।

आत्मा का धर्म नहीं है दुख