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जैविक खेती के प्रति बढ़ा रुझान

6 वर्ष पहले
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जैविक खेती की ओर बढ़ रहा जिले के किसानों का रुझान।
विदिशा। हेल्दी फूड को बढ़ावा देने के लिए अब जिले के कई किसान आगे रहे हैं। जैविक खेती को लेकर किसानों का रुझान भी बढ़ने लगा है। जैविक खेती करने वाले विदिशा के 154 किसानों ने कृषि विभाग में अपना रजिस्ट्रेशन भी करवाया है। ये किसान फिलहाल अपने कुछ रकबे में जैविक खेती कर रासायनिक उर्वरकों के दुष्प्रभाव से बचाव कर रहे हैं। धीरे-धीरे इस रकबे में और बढ़ोतरी का प्रयास चल रहा है।

कृषि विभाग के अधिकारी अन्य किसानों को भी प्रशिक्षण के माध्यम से जागरुक करने में जुटे हैं। इससे निकट भविष्य में जैविक खेती करने वाले किसानों को बढ़ावा मिलेगा और लोगों को रासायनिक खादों के दुष्प्रभाव से भी मुक्ति मिल सकेगी। जैविक खेती के माध्यम से अनाज उत्पादन करने वाले किसानों को कृषि विभाग ने अपने अनाज और बीज को स्व प्रमाणित करने की भी सुविधा दी है।
जैविक उत्पादक किसान अपने बीज प्रमाणित करने के लिए मप्र राज्य जैविक प्रमाणीकरण संस्था में प्रमाणीकरण करवा सकते हैं। इससे उनकी एक अलग पहचान बनेगी तथा वे जैविक खेती के माध्यम से अनाज, फल और सब्जियों का प्रचुर मात्रा में उत्पादन और विक्रय कर सकेंगे। जैविक उत्पादन के दाम ज्यादा मिलने से उनको आर्थिक फायदा भी होगा।

बड़ी संख्या में मिलेंगे खरीदार : अनाज तिलहन व्यापार संघ के अध्यक्ष विनोद जैन बताते हैं मंडी में अभी किसान जैविक उत्पादन लेकर नहीं रहे हैं। जो किसान जैविक खेती करते हैं, उनके अनाज की बिक्री घर से ही हो जाती है। यदि ऐसे किसान अपना जैविक अनाज लैब में टेस्ट करवाकर और उसे प्रमाणित करवाकर मंडी में लाएंगे तो उसके लेवाल बड़ी संख्या में मिल जाएंगे। जैविक अनाज की कीमत भी 500 रुपए प्रति क्विंटल तक ज्यादा रहेगी।

प्रयोग के तौर पर 5 बीघे में कर रहे हैं जैविक खेती : सोंठिया रोड स्थित नेशनल कैप्सूल्स फैक्ट्री के एमडी राकेश शर्मा ने बताया कि उन्होंने प्रयोग के तौर पर करीब 5 बीघा जमीन पर जैविक खेती का उत्पादन शुरू किया है। गेहूं के साथ फल और सब्जियों की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। वहीं उन्नत कृषक रमेश माहेश्वरी ने बताया कि वे करीब पांच साल से 5 बीघा में अनाज और फलों की जैविक खेती कर रहे हैं।

एकब्रांड के रूप में बनेगी विदिशा की पहचान : '' विदिशा जिले में जैविक खेती के लिए किसान आगे रहे हैं। शरबती गेहूं की तरह अब आने वाले समय में जिले में किसानों द्वारा तैयार जैविक अनाज को एक ब्रांड के रूप में पहचान मिल सकेगी। हम ऐसे किसानों का पंजीयन कर रहे हैं। जैविक उत्पादन करने वाले किसान अपने अनाज का स्व प्रमाणीकरण भी करवा सकते हैं। राज्य स्तरीय हाट मेला मंडला में जैविक खेती को लेकर रिसर्च भी हुआ है। बीएल बिलैया, उप संचालक कृषि विदिशा