विदिशा। रविवार को डाइट भवन में संस्कृत भारती और जिला संस्कृत इकाई द्वारा संस्कृत सम्मेलन हुआ। इस दौरान संस्कृत की प्रर्दशनी लगाई गई। प्रदर्शनी में दर्शकों के लिए सैकड़ों साल पुरानी हस्त लिखित पांडुलिपियां देखने को मिलीं।
कार्यक्रम के शुभारंभ पर संस्कृत भारती के अखिल भारतीय अध्यक्ष चंद्रकिरण सलूजा ने कहा कि शिक्षा, समाज में सामंजस्य और लोक संस्कृति के लिए संस्कृत आवश्यक है। सभी कहते हैं कि ग्लोबलाइजेशन की बात होना चाहिए लेकिन संस्कृत भाषा के ग्रंथों में हजारों साल पहले वसुधैव कुटुंबकम की बात कही गई।
संस्कृत भाषा में प्रकृति को महत्व दिया गया है। इस मौके पर जिला पंचायत सीईओ चंद्रमोहन मिश्रा ने कहाकि संस्कृत शिविर संस्कृत के प्रति जिज्ञासा पैदा करते हैं। संयोजक डा जेएस चौहान का कहना था कि विश्व को एक करने के लिए संस्कृत भाषा जरूरी है।
मातृशक्ति सम्मेलन में रखे विचार : सम्मेलन में मातृशक्ति सम्मेलन सत्र में महिलाओं ने अपने विचार रखे। डॉ दीप्ति शुक्ला का कहना था कि वेदों में नारी को शक्ति का रूप कहा गया है। मातृशक्ति वात्सल्य से परिपूर्ण है। मां बच्चे की पहली पाठशाला है। भाषा विज्ञान का अध्ययन करने पर पता चलता है कि सभी भारतीय भाषाओं का उद्भव संस्कृत ही है।
कुसुम कटारे का कहना था कि सभी भाषाओं की जननी संस्कृत है। संस्कृत के बिना संस्कृति विलुप्त हो जाएगी। डॉ वनिता वाजपेयी का कहना था कि हमारी भाषा विचारों की संवाहक है। संस्कृत भाषा का विकल्प नहीं है।
कार्यक्रम में कलेक्टर एमबी ओझा, एसपी धर्मेंद्र चौधरी, घनश्याम बंसल, एचएन नेमा ने भी अपने विचार रखे। इस मौके पर डा नितिन, डा राजेश जैन, संजय श्रीवास्तव, डा रमेश ठाकुर, शिवकुमार तिवारी आदि मौजूद थे।